मनुष्य हूँ मैं… मुस्कान ओढ़े फिरता हूँ, भीतर कितने तूफ़ान हैं, ये किससे कहता हूँ? भीड़ में रहकर भी अक्सर खुद को तन्हा पाता हूँ, हँसी के पीछे छुपे दर्द…
vivratidarpan.com जबलपुर – सशक्त हस्ताक्षर की 47 वीं काव्य गोष्ठी नूतन मराठी स्कूल गोल बाजार में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपने शब्द सुमनों से…
vivratidarpan.com आखिर अमेरिका वाले भूरा भाई ने सर्टिफिकेट दे ही दिया कि भारत एक नर्क है, फिर बाद में केने लगे भारत एक महान देश है इसके बाद बोले कि चीन…
वंदन तुझे, हे श्रमवीर! वंदन तुझे, हे श्रमवीर!! अंबर छूते शिखर सभी ये, तेरी ही पहचान, तेरे श्रम की रेखाओं से, रचता नव निर्माण। भट्टियों की ज्वाला बोले, तेरी ही…
श्रम की कीमत क्या होती है, इसको लें हम सब पहचान। मेहनतकश मजदूर श्रमिक का, मिलकर रखें सदा हम ध्यान। चींटी भी श्रम करती दिनभर, दाना-दाना चुनती है। बिना रुके…