मैं शाम की लड़की हूँ – रुचि मित्तल

मैं शाम की लड़की हूँ रोशनी मुझ पर ठहर सी जाती है। जैसे फ़व्वारे की हर बूँद मेरे नाम की कोई ख़ामोश दुआ लेकर गिरती हो बिना शोर किए, बस…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

आग फैली है फिज़ाओं में हवा कैसे बहे । देवता घायल पड़े शैतानियत के कहकहे ।   आदमीयत रो रही आतंक के इस दौर में , राजनेता कर रहे इस…

सेवा – जया भराड़े बड़ोदकर 

vivratidarpan.com – सुधा सब कुछ छोड़ कर आश्रम में आ गई है। उसे अपने जीवन में कुछ भी करने को नहीं रह गया था। घर में बहुत खुश थी। पर…

मनुष्य की व्यथा – अविनाश श्रीवास्तव

मनुष्य हूँ मैं… मुस्कान ओढ़े फिरता हूँ, भीतर कितने तूफ़ान हैं, ये किससे कहता हूँ? भीड़ में रहकर भी अक्सर खुद को तन्हा पाता हूँ, हँसी के पीछे छुपे दर्द…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

आग फैली है फिज़ाओं में हवा कैसे बहे । देवता घायल पड़े शैतानियत के कहकहे ।   आदमीयत रो रही आतंक के इस दौर में , राजनेता कर रहे इस…

सशक्त हस्ताक्षर की काव्य गोष्ठी संपन्न हुई

vivratidarpan.com जबलपुर – सशक्त हस्ताक्षर की 47 वीं काव्य गोष्ठी नूतन मराठी स्कूल गोल बाजार में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपने शब्द सुमनों से…

भूरा भाई का मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (व्यंग्य) – मुकेश “कबीर”

vivratidarpan.com आखिर अमेरिका वाले भूरा भाई ने सर्टिफिकेट दे ही दिया कि भारत एक नर्क है, फिर बाद में केने लगे भारत एक महान देश है इसके बाद बोले कि चीन…

वंदन तुझे, हे श्रमवीर (गीत) – डॉ ओम प्रकाश मिश्र

वंदन तुझे, हे श्रमवीर! वंदन तुझे, हे श्रमवीर!! अंबर छूते शिखर सभी ये, तेरी ही पहचान, तेरे श्रम की रेखाओं से, रचता नव निर्माण। भट्टियों की ज्वाला बोले, तेरी ही…

मेरी कलम से – डा० क्षमा कौशिक

लय के तार पर सध कर मधुर संगीत बजता है। विचारों की कसौटी पर शब्द संसार सजता हैं। कविता में निखर कर भाव का संसार पगता है। दिल में प्रेम…

श्रम का महत्व – प्रवीण त्रिपाठी

श्रम की कीमत क्या होती है, इसको लें हम सब पहचान। मेहनतकश मजदूर श्रमिक का, मिलकर रखें सदा हम ध्यान। चींटी भी श्रम करती दिनभर, दाना-दाना चुनती है। बिना रुके…