कभी बैठकर कभी लेटकर चलकर रोये बाबू जी, घर की छत पर बैठ अकेले जमकर रोये बाबू जी। अपनों का व्यवहार बुढ़ापे में ग़ैरों सा लगता है, इसी बात…