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जलते पुतले, बढ़ते रावण – प्रियंका सौरभ

जलते पुतले देखकर, खुश होता संसार। मन के रावण पल रहे, कौन करे संहार॥ पुतला जलकर राख है, मन में भरा विकार। कैसे होगा अंत फिर, झूठ-कपट- अहँकार॥ रावण के…

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जलते पुतले, बढ़ते रावण – प्रियंका सौरभ

जलते पुतले देखकर, खुश होता संसार। मन के रावण पल रहे, कौन करे संहार॥ पुतला जलकर राख है, मन में भरा विकार। कैसे होगा अंत फिर, झूठ-कपट- अहँकार॥ रावण के…