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आशा की किरण – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

अँधियारे के आँगन में, एक रेखा उजियारी, चुपके से आ बैठी, बनकर नई सवारी। टूटे हुए सपनों की, धूल अभी बाकी थी, उसमें ही चमक उठी, जैसे कोई ज्योति पावन…

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आशा की किरण – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

अँधियारे के आँगन में, एक रेखा उजियारी, चुपके से आ बैठी, बनकर नई सवारी। टूटे हुए सपनों की, धूल अभी बाकी थी, उसमें ही चमक उठी, जैसे कोई ज्योति पावन…