उठाकर कलम लिखने बैठी आज एक सच्ची कहानी उमड़ पड़ा ग़मों का सैलाब जो रोके नहीं रुका भीग गया कागज़ और कलम एहसासों के समुद्र में चाहकर भी उतार न…