मन में धधक उठी है ज्वाला, दुश्मन तूने क्या कर डाला। रँगा रक्त में पुनः तिरंगा, उद्वेलित सब को कर डाला। गलत राह तूने है पकड़ी। गर्दन व्यर्थ दम्भ में…