पुष्प खिले हैं हर कहीं, पवन बहे अति मंद। भँवरे आतुर हैं सभी, पीने को मकरंद।। छटा बिखेरें तितलियाँ, रंग-बिरंगे फूल। खग छेड़ें स्वर लहरियाँ, पा मौसम अनुकूल।। <> आदमी…
पुष्प खिले हैं हर कहीं, पवन बहे अति मंद। भँवरे आतुर हैं सभी, पीने को मकरंद।। छटा बिखेरें तितलियाँ, रंग-बिरंगे फूल। खग छेड़ें स्वर लहरियाँ, पा मौसम अनुकूल।। <> आदमी…