जलते पुतले देखकर, खुश होता संसार। मन के रावण पल रहे, कौन करे संहार॥ पुतला जलकर राख है, मन में भरा विकार। कैसे होगा अंत फिर, झूठ-कपट- अहँकार॥ रावण के…