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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

प्यार करते बड़ा, मान जाना पड़ा, दर्द अपना हमें, सब भुलाना पड़ा।   सात जन्मों का तेरा मेरा साथ है, प्यार अपना मुझे फिर जताना पड़ा।   इश्क होता फरेबी…

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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

प्यार करते बड़ा, मान जाना पड़ा, दर्द अपना हमें, सब भुलाना पड़ा।   सात जन्मों का तेरा मेरा साथ है, प्यार अपना मुझे फिर जताना पड़ा।   इश्क होता फरेबी…