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अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती – सविता सिंह

सघन तम में मन विकल, नयन मरु में उमड़े बादल निज उर की ही थाह न पाती, अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती। तुम मुझ में और मैं हूँ तुममें,…

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अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती – सविता सिंह

सघन तम में मन विकल, नयन मरु में उमड़े बादल निज उर की ही थाह न पाती, अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती। तुम मुझ में और मैं हूँ तुममें,…