vivratidarpan.com – सांझ ढल चुकी थी और आहिस्ता-आहिस्ता स्याही बस्ती पर पसर रही थी। रोशनी के नाम पर लैंपपोस्टों और घरों में रोशन बल्बों का ही सहारा था, अन्यथा बस्ती…
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