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सुरक्षकर्मियों की विडंबना – प्रवीण त्रिपाठी

शस्त्र बल, सब को सुहाते किसलिये। मान के सब गान गाते किसलिये।1 ढेर सारे, क्षेत्र जब व्यवसाय के। मौत से पंजा लड़ाते किसलिये।2 हर विपद में, सैनिकों को याद कर।…

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सुरक्षकर्मियों की विडंबना – प्रवीण त्रिपाठी

शस्त्र बल, सब को सुहाते किसलिये। मान के सब गान गाते किसलिये।1 ढेर सारे, क्षेत्र जब व्यवसाय के। मौत से पंजा लड़ाते किसलिये।2 हर विपद में, सैनिकों को याद कर।…