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किंकर्तव्यविमूढ़ लोक की नियति और संवाद की पुनर्स्थापना – विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – राजतंत्र की राजनीति का एक स्पष्ट और स्वीकृत सिद्धांत रहा है , दंड विधान। वहाँ शत्रु और मित्र की परिभाषाएं सीमाओं, सिंहासनों और संधियों से तय होती थीं। जब…

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