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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

अब स़ज़ी है ये म़ह़फिल भी आऐ सभी। रौनकें आज़ महफिल बढाऐ सभी।मतला   आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये। जान अपनी हमेशा लुटाऐ सभी।,   साज छेडो पिया तुम…

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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

अब स़ज़ी है ये म़ह़फिल भी आऐ सभी। रौनकें आज़ महफिल बढाऐ सभी।मतला   आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये। जान अपनी हमेशा लुटाऐ सभी।,   साज छेडो पिया तुम…