शायद किसी पुरानी किताब के बीच दबा हुआ वो सुर्ख गुलाब है जिसकी पंखुड़ियाँ तो सूख गई हैं पर खुशबू अब भी पन्नों में सांस लेती है। ये वो बेनाम…