मेरा रिश्ता जोड़ दिया दूजे आँगन से ओ बाबुल क्यों हुई पराई अब भी याद आती हैं मुझको वो गलियाँ वो अंगनाई क्यों हुई पराई भूल गए क्यों मैं भी…