जय बजरंगबली – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

अंजनी के पुत्र आप, दूर करें कष्ट ताप. बल बुद्धि है असीम बड़े गुणवान हैं।   सर्वश्रेष्ठ राम भक्त, व्यर्थ नहीं करें वक्त, रघुवर के कार्य को करते प्रयाण हैं।…

छपकर बिकते थे कभी – प्रियंका सौरभ

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार, ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता…

चलें ख़ुद ही सहते – सुनील गुप्ता

ग़म ग़लत करते, स्वयं ही पीते…., चलें सदैव, ख़ुद ही सहते !!1!!   दुःख भूलाते चलें, रहें मन मोड़ते…., चलें अपने, दुःखों से उबरते !2!!   गम होएं कम, जब…

हूर के खजाना – श्याम कुंवर भारती

तोहार मुंह लागे चान गोरी मोरे परान लेवे के बहाना बन गइलू। अंखियां लागे रतनार महक कचनार हूर के खजाना बन गइलू ।   मुस्की कटार कमर कमल के डार…

मैं शाम की लड़की हूँ – रुचि मित्तल

मैं शाम की लड़की हूँ रोशनी मुझ पर ठहर सी जाती है। जैसे फ़व्वारे की हर बूँद मेरे नाम की कोई ख़ामोश दुआ लेकर गिरती हो बिना शोर किए, बस…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

आग फैली है फिज़ाओं में हवा कैसे बहे । देवता घायल पड़े शैतानियत के कहकहे ।   आदमीयत रो रही आतंक के इस दौर में , राजनेता कर रहे इस…

सेवा – जया भराड़े बड़ोदकर 

vivratidarpan.com – सुधा सब कुछ छोड़ कर आश्रम में आ गई है। उसे अपने जीवन में कुछ भी करने को नहीं रह गया था। घर में बहुत खुश थी। पर…

मनुष्य की व्यथा – अविनाश श्रीवास्तव

मनुष्य हूँ मैं… मुस्कान ओढ़े फिरता हूँ, भीतर कितने तूफ़ान हैं, ये किससे कहता हूँ? भीड़ में रहकर भी अक्सर खुद को तन्हा पाता हूँ, हँसी के पीछे छुपे दर्द…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

आग फैली है फिज़ाओं में हवा कैसे बहे । देवता घायल पड़े शैतानियत के कहकहे ।   आदमीयत रो रही आतंक के इस दौर में , राजनेता कर रहे इस…

सशक्त हस्ताक्षर की काव्य गोष्ठी संपन्न हुई

vivratidarpan.com जबलपुर – सशक्त हस्ताक्षर की 47 वीं काव्य गोष्ठी नूतन मराठी स्कूल गोल बाजार में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सर्वप्रथम संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने अपने शब्द सुमनों से…