ग़ज़ल – रीता गुलाटी

ऐसा है मेरा यार,मै तकरार क्या करूँ? तू बेवफा है तुझसे भला प्यार क्या करूँ?   पलके झुका ली मैने कि इज़हार क्या लिखूँ, नाकाम मोहब्बत पे  मैं यल़गार क्या…

अधूरी ख्वाहिशे जिंदगी की – नीलांजना गुप्ता

अधूरी ख्वाहिशें जिन्दगी की लुभाती हैं। मृगतृष्णा के रेगिस्तान में दौड़ाती हैं ।। अपनी परछाई यहाँ कौन पकड़ पाया है। हैं दिवास्वप्न ये इंसान को घुमाती हैं।। सबने पलकों पे…

कवि ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति को किया सम्मानित

vivratidarpan.com – विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली में ईश्वर चंद्र विद्यावाचस्पति मनकापुर (गोंडा): मेंहदावल संत कबीर नगर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक वरिष्ठ कवि ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति को विश्व पुस्तक मेला प्रगति…

कविता – जसवीर सिंह हलधर

मिला खून माटी उगाता हूँ दाने,यही साधना मैं इसी का पुजारी । नहीं धूप देखूँ नहीं छांव देखूँ , पड़े पाँव छाले नहीं है सवारी ।। मरूँ भूख से या…

मंदिर सोमनाथ — नीतू रानी

सोमनाथ केअ शोभायात्रा में निकललखिन्ह प्रधानमंत्री सरकार हे बहिना, संग में मंत्री दुई चार। एक सौ अठारह घोड़ा पर बैसल सैनिक राज कुमार हे —–2, रथ में खड़ा भेल प्रधानमंत्री…

लोहड़ी – रुचि मित्तल

धुंधली शाम में आग जलती है चुपचाप। लकड़ियाँ फटकती हैं चिंगारियां उड़ती आसमान की ओर। खेतों से आती फसल की खुशबू गेहूं के सुनहरे दाने सरसों के फूलों की पीली…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

देते  दुआ है सबको लब पे हँसी  लिखी हो, ए काश ग़म़ न आए, बस मस्ती लिखी हो।   क्यों चाँद आज हमको आँखें बड़ी दिखाएँ, किस्मत में यार जिसके…

ना समझ सी मैँ – रेखा मित्तल

नासमझ सी मैँ पता नहीं सुधर रही हूँ या बिखर रही हूँ थक गई हूँ समझाते-समझाते नहीं दिखा सकती अपने मन की बेचैनियाँ अधकचरे ख्वाबों की दास्ताँ जीवन के इस…

तिथि – सविता सिंह

कुछ तिथियाँ कैलेंडर में नहीं होतीं, वे हृदय में दर्ज होती हैं। उन दिनों मन उदास नहीं होता, बस उनके पास चला जाता है। जनवरी फिर आ गया है। कैलेंडर…

इक साल कम हो गया – विनोद निराश

सुनो जी ! लोग कहते थे, मगर अब सच लगने लगा, पुराना साल विदा क्या हो गया ?, मेरी ज़िंदगी का इक साल कम हो गया। वो चन्द पुरानी यादें,…