यह कलयुग है भाई, यहाँ रिश्ते भी बिकते हैं, मतलब के यारों से, अब घर-आँगन टिकते हैं। बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया, धर्म की बात करे जो, उसे…
vivratidarpan.com – कहानिका हिंदी पत्रिका के छत्तीसगढ़ अध्याय द्वारा गूगल मिट पर नावेद रजा दुर्गावी,उप संपादक छत्तीसगढ़ अध्याय के जन्म दिन के अवसर पर एक अखिल भारतीय आभासी कवि सम्मेलन…