vivratidarpan.com – एकल संग्रहों की श्रृंखला में एक और संग्रह का प्रवेश हुआ है, और यह है होनहार युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी के ‘सारंग राग’ का।जो संवेदनाओं की स्वर लहरी…
अरि दल थर-थर काँप उठे थे, रण में जब हुंकार हुई, मेवाड़ों के सिंह प्रतापी की फिर जय-जयकार हुई। हाथों में थी तेज तलवारें, आँखों में अंगार लिए, मातृभूमि की…
अंजनी के पुत्र आप, दूर करें कष्ट ताप. बल बुद्धि है असीम बड़े गुणवान हैं। सर्वश्रेष्ठ राम भक्त, व्यर्थ नहीं करें वक्त, रघुवर के कार्य को करते प्रयाण हैं।…