प्रेम और मानवीय संबंधों का ‘सारंग राग’ (पुस्तक समीक्षा) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com –  एकल संग्रहों की श्रृंखला में एक और संग्रह का प्रवेश हुआ है, और यह है होनहार युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी के ‘सारंग राग’ का।जो संवेदनाओं की स्वर लहरी…

क्या हूँ मैं ? – सविता सिंह.

कभी लगता है, मैं क्या हूँ, खुद से ही पूछूँ कौन हूँ, रिश्तों की डोरी से उलझी , खुद से रही अनजान हूँ। कई- रिश्ते, कई संबंध, हर से निकलते…

जन्नत – जया भराड़े बड़ोदकर

Vivratidarpan.com – राजू आज बड़ा हो गया है। कल जब वह छोटा था। तो मां को परेशान कर के रख देता था। खाना खाने में बहुत परेशान कर देता था।…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

शब भर के उनको देखूँ सितारा नही मिला, टूटा है आज दिल भी वो चेहरा नही मिला।   तड़पा बड़ा था यार दिलासा नही मिला, खाता रहा मैं ठोकरें सहारा…

माँ का आँचल – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

माँ का आँचल धूप में जैसे ठंडी छाँव उतर आए, सूखे मन के आँगन में जैसे सावन गुनगुनाए।   जब दुनिया ने ठुकराया, माँ ने सीने से लगाया, टूटे हुए…

महाराणा प्रताप – डॉ अनमोल कुमार

अरि दल थर-थर काँप उठे थे, रण में जब हुंकार हुई, मेवाड़ों के सिंह प्रतापी की फिर जय-जयकार हुई। हाथों में थी तेज तलवारें, आँखों में अंगार लिए, मातृभूमि की…

जय बजरंगबली – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

अंजनी के पुत्र आप, दूर करें कष्ट ताप. बल बुद्धि है असीम बड़े गुणवान हैं।   सर्वश्रेष्ठ राम भक्त, व्यर्थ नहीं करें वक्त, रघुवर के कार्य को करते प्रयाण हैं।…

छपकर बिकते थे कभी – प्रियंका सौरभ

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार, ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता…

चलें ख़ुद ही सहते – सुनील गुप्ता

ग़म ग़लत करते, स्वयं ही पीते…., चलें सदैव, ख़ुद ही सहते !!1!!   दुःख भूलाते चलें, रहें मन मोड़ते…., चलें अपने, दुःखों से उबरते !2!!   गम होएं कम, जब…

हूर के खजाना – श्याम कुंवर भारती

तोहार मुंह लागे चान गोरी मोरे परान लेवे के बहाना बन गइलू। अंखियां लागे रतनार महक कचनार हूर के खजाना बन गइलू ।   मुस्की कटार कमर कमल के डार…