कविता – श्याम कुंवर भारती

बूढ़ा न नादान अभी तो मैं जवान हूं। दूध घी बादाम अभी तो मैं जवान हूं।   उम्र ढले या न ढले दिल रहे कायम । मन से रहता बच्चों…

प्रेम और मानवीय संबंधों का ‘सारंग राग’ (पुस्तक समीक्षा) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com –  एकल संग्रहों की श्रृंखला में एक और संग्रह का प्रवेश हुआ है, और यह है होनहार युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी के ‘सारंग राग’ का।जो संवेदनाओं की स्वर लहरी…