प्रभाती वंदन – डॉ गीता पांडेय अपराजिता

आकर्षित करता सदा,मांँ लक्ष्मी का रूप। जिस पर करती है कृपा, महिमा दिव्य अनूप। खुशियांँ मिले अपार है,गेह बने हैं स्वर्ग, विचलित वह होता नहीं, छांँव रहे या धूप।। कृपा…

नाप रहे फुटपाथ – डॉ. सत्यवान सौरभ

स्याही, कलम, दवात से, सजने थे जो हाथ। कूड़ा-करकट बीनते, नाप रहे फुटपाथ।।   जिन आँखों में स्वप्न थे, पढ़ने के अरमान। धूल धुएँ में ढूँढते, जीवन का सामान।। कैसा…

ऊर्जा संकट के समाधान का मूलमंत्र संयम, स्वदेशी और साझेदारी – मनोज कुमार अग्रवाल 

vivratidarpan.com – हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऊर्जा संकट के इस दौर में ऊर्जा सुरक्षा के संयमित उपयोग के कर्तव्य बोध के प्रति जागरूक किया…

कविता – श्याम कुंवर भारती

बूढ़ा न नादान अभी तो मैं जवान हूं। दूध घी बादाम अभी तो मैं जवान हूं।   उम्र ढले या न ढले दिल रहे कायम । मन से रहता बच्चों…

प्रेम और मानवीय संबंधों का ‘सारंग राग’ (पुस्तक समीक्षा) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com –  एकल संग्रहों की श्रृंखला में एक और संग्रह का प्रवेश हुआ है, और यह है होनहार युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी के ‘सारंग राग’ का।जो संवेदनाओं की स्वर लहरी…