अधूरी ख्वाहिशें जिन्दगी की लुभाती हैं। मृगतृष्णा के रेगिस्तान में दौड़ाती हैं ।। अपनी परछाई यहाँ कौन पकड़ पाया है। हैं दिवास्वप्न ये इंसान को घुमाती हैं।। सबने…
vivratidarpan.com – नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी/कवि/साहित्यिकार सुरेश चंद्र जोशी के जन्मोत्सव पर ‘त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये’ ई पत्रिका भाग-21 का अशोक दोशी ने 15 सितंबर को आभासी…
हे गणपति हे सिद्धि विनायक, हे बुद्धि के विधाता, तुम हो विघ्न विनाशक जग में, तुम्हीं सुखों के दाता। बड़े बड़े कानों से तुम फरियादें सबकी सुनते, अपने चारों हाथों…