गीत — जसवीर सिंह हलधर

चैतन्य तरुण हो गयी धरा ,जब से मेघा जल बरसाये । कोयल ने राग विरह छोड़ा, मल्हार राग फिर दुहराये ।   धरती ने मैल क्षरण करके, देखो नव यौवन…

हरेला – डॉ क्षमा कौशिक

आज हरेला पर्व है हरियाली  त्योहार। वृक्ष लगाकर कर रहे, धरती का श्रृंगार । पर्व मनाने  मात्र से, नही बनेगी बात। वृक्षों का संरक्षण हो, तभी बनेंगी बात। वृक्षों की…

बेबस बेटी – सुनील गुप्ता

( 1 ) बेबस बेटी वो गंगानगर की.., रोयी तड़पी !! ( 2 ) नर पिशाच बत्तीस शैतानों ने.., आत्मा कुचली !! ( 3 ) पांच दिनों में सैकड़ों बार…

गजल – नीलांजना गुप्ता  

अलविदा हमको न ऐसे कीजिए,        बस जरा सा मुस्कुरा ही दीजिए,   गम बहुत हैं इस जहां में दोस्तों, दामन खुशियों का न थामा कीजिये,   डस…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

बात दिल की कहे मुस्कुराते हुए, राज दिल का कहे गुनगुनाते हुए।   होश उसने उड़ाये अदा से बड़े, जाम मस्ती का अपने पिलाते हुए।   दर्द दिल का सभी…

क्या खूब कहा है किसी ने – सुनील गुप्ता

( 1 ) क्या खूब कहा है किसी ने, बाद में जी लूंगा, जी भरकर  ! अभी, थोड़ा ठहरा तो हो जाएगी मुश्किल., मुड़कर देखने का कहाँ समय है यहाँ…

राधा कृष्ण – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

बरसाने की गलियों में, बंसी की धुन छाई, श्याम नाम की मीठी लहर, हर दिल को बहलाए। राधा की पायल बोले, प्रेम की भाषा प्यारी, कान्हा की मुस्कान में, छुपी…

रूप चुराया मेरा – अनिल भारद्वाज

जीने की आरजू छीन क्या खुश न हुआ मन तेरा, तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा। तेरे सुंदर से सुंदर मनमोहक चित्र बनाए, पूजा तुझे उम्र भर…

अहंकार और आत्मसम्मान (आलेख) – डॉ. शिखा गोस्वामी

vivratidarpan.com – मनुष्य के व्यक्तित्व को उसके गुण, व्यवहार और संस्कार महान बनाते हैं, लेकिन जब उन्हीं गुणों में अहंकार का विष घुल जाता है, तब उनका कोई महत्व नहीं रह…

ढाई आख़र  – सविता सिंह

तुम्हारी यह प्रेम भरी बातें न जाने क्यों मुझमे प्रेम नहीं भर पाती। मत कहो तुम प्यार करते हो आई लव यू ये शब्द हमें लुभाते नहीं। यह ढाई आख़र…