सितारों में तू,चाँद बन खिल आए – सुनील गुप्ता

( 1 ) सितारों में तू चाँद बन खिल आए.., मेरे अरमानों को पंख लगाए !! ( 2 ) मन फलक पे तू चाँदनी बिखेरती जाए.., मेरे आनन पे खुशी…

अब वो सब बच्चे मेरे ही तो हैं – पीयूष गोयल

vivratidarpan.com – सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ जर्मनी में, छोटा बेटा भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर, ६ महीने…

महारास – सुनील गुप्ता

( 1 ) दिव्य मिलन है महारास पर्व.., हरि भक्तों का  !! ( 2 ) गोपियों साथ भगवान कृष्ण ने.., रचाया रास  !! ( 3 ) वृंदावन में शरद पूर्णिमा…

बदल दो कहानी – सुनील गुप्ता

बना लिया है खुद को बुरा और निकल पड़ा हूँ कहानी से ! होगा मुझमें कुछ भी खरा.., तो लौट आऊंगा जल्दी फिरसे !!1!!   बेतकल्लुफ़ होकर चला जा रहा…

यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव काव्यधारा श्रेष्ठ काव्य शिल्पी सम्मान-2026 से सम्मानित

vivratidarpan.com गोण्डा (उत्तर प्रदेश) –  राजधानी लखनऊ में जिले वरिष्ठ कवि साहित्यकार यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव को ‘काव्यधारा: श्रेष्ठ काव्य शिल्पी सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया है। अखिल भारतीय काव्य…

प्रश्नपत्र है ज़िंदगी – डॉ. सत्यवान सौरभ

प्रश्नपत्र है ज़िंदगी, उत्तर अपने कर्म। सच की स्याही से लिखो, जीवन का तुम मर्म॥   सबको खुश कर आज तक, कौन हुआ खुशहाल। अपने मन से पूछना, क्या है…

अधूरा प्रेम – कंचन श्रीवास्तव

चांदनी आज भी वैसे ही बरसती है घर , आंगन, दलान दुआर- मोहार सब शीतल करती है सबके चेहरे पर सुकून और मुस्कान दिखती है घर की बहू – बेटियां…

पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

आज की सोचो कल क्या होगा किसने देखा है। आज सुखद और सफल हो क्या हमने सोचा है।   अगर आज सुधर गया कल खुद संवर जाएगा। आने वाली सारी…

जिंदगी की तपन – जितेंद्र कुमार

रेत पर नाम वें मेरा लिखते रहें, हर दफा सागर उसको मिटाते रहेंl मैंने उनसे कहाँ पत्थरों पर लिखो, पत्थरों पर लिखें लब्ज़ मिटते नहीं   उसके हर शब्द मीठे…

मंच की भीड़ में खोता साहित्य – रीता गुलाटी

vivratidarpan.com –  क्या साहित्य की आवाज़ सचमुच पाठक तक पहुँच रही है, या वह मंच की भीड़ में कहीं खोती जा रही है? कहा जाता है—“साहित्य समाज का दर्पण है।”…