यह रेखा है – ज्योत्सना जोशी

Vivratidarpan.com – जब मैं गौचर से देहरादून शिफ्ट हुई तो शुरूआत में मैंने सोच लिया था कि दो चार साल किसी तरह निकाल लूंगी और फिर गौचर चली जाऊंगी, क्योंकि…

विश्व साइकिल दिवस (3 जून)- डॉ अनमोल कुमार

दो पहियों पर चलती जिंदगी, न पेट्रोल की चिंता, न प्रदूषण की गंदगी। बचपन की यादें, जवानी की सवारी, साइकिल है सच में सबकी प्यारी। पापा की उंगली पकड़ के…

हँसता हुआ – नीलांजना गुप्ता

कोई हँसता हुआ गुलाब हो तुम, न जाने किसका आफ़ताब हो तुम।   सरजमीं पर नहीं देखा तुमको, किसी शायर का हसीं ख्वाब हो तुम।   चाँदनी में नहा कर…

कौड़ी का कमाल – पवन वर्मा

vivratidarpan,com – कभी भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे छोटी इकाइयों में गिनी जाने वाली कौड़ी इन मध्य प्रदेश की राजनीति के साथ ही न्यूज़ एंकर और यू ट्यूबर्स के बीच धमाल…

आर्यावर्त की अनुपमाएं मां से चन्द्रमा तक अद्भुत कृति – कवि संगम त्रिपाठी

vivratidarpan.com – मातृशक्ति को समर्पित अद्भुत कृति आर्यावर्त की अनुपमाएं मां से चन्द्रमा तक संस्कारधानी जबलपुर की सिद्धहस्त कवयित्री सिद्धेश्वरी सराफ शीलू की किताब साहित्य जगत को समर्पित है। कवयित्री…

सिंदूर का सत्य – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मांग में सजा वो लाल उजाला, सिर्फ रंग नहीं, जीवन का रखवाला। हर कण में बसी है प्रार्थना गहरी, सात वचनों की अमर कहानी ठहरी। सिंदूर नहीं बस सौभाग्य की…

पुरानी किताब – रुचि मित्तल

शायद किसी पुरानी किताब के बीच दबा हुआ वो सुर्ख गुलाब है जिसकी पंखुड़ियाँ तो सूख गई हैं पर खुशबू अब भी पन्नों में सांस लेती है। ​ये वो बेनाम…

हिंदी कविता – रेखा मित्तल

उठाकर कलम लिखने बैठी आज एक सच्ची कहानी उमड़ पड़ा ग़मों का सैलाब जो रोके नहीं रुका भीग गया कागज़ और कलम एहसासों के समुद्र में चाहकर भी उतार न…

फिर वो सुबह आएगी – सविता सिंह

शुष्क है यह भग्न उर नीर नयनों में भरा ताप विरहाग्नि सहे, कंपित हुई यह धरा। तिमिरमय इस चेतना में भोर फिर से क्या उगेगी? तृप्ति फिर से तब मिलेगी!!…

हीट वेव – सुनील गुप्ता

( 1 ) भीषण गर्मी हीट वेव लहर.., धरा बंजर  !! ( 2 ) कंठ हैं सूखे तड़पते अधर.., जाएं किधर !! ( 3 ) हैं जीव जंतु सभी प्यासे…