भजन – नीलांजना गुप्ता

रे मनुआ साँसे छलती जाये, कालगति समझ न तुझको आये।   लगा रहे नित जगत कर्म में, करे न प्रभु की फेरी। बीती जाये उमरिया यूँ ही, करते तेरी मेरी।…