गर्म हवा के झोंके चलते – अनिल भारद्वाज

आग उगलती दोपहरी यह अंगारे सा दिन, कब अषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। ज्वालामुखी ग्रीष्म ऋतु का तन लावा जैसा मन, कब अषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। सड़कों…

विश्व पर्यावरण दिवस – कविता बिष्ट

हरियाली हो गोद धरा की, पर्यावरण बचाओ। नवल पौध को देखो, सींचो, खुशहाली तुम लाओ।। लता, विटप, तरु, फूल, शजर अरु तरुवर खूब उगाओ। हरियाली हो गोद धरा की, पर्यावरण…

स्त्री – कंचन श्रीवास्तव

स्त्री खुश होती है छोटे छोटे अहसासों से जैसे जाड़े में सूखे कड़क कपड़ों से पति बच्चों की जरूरतों पर खरी उतरने से खुश होती है उनके लिए जी कर…

अंतर्राष्ट्रीय आभासी कवि सम्मेलन हुआ सम्पन्न

vivratidarpan.com  झारखंड- कहानिका हिंदी पत्रिका झारखंड के इंटरनेशन चैप्टर दुबई द्वारा  गूगल मिट पर वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विषय पर एक आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ।जिसमें…

झरना (पहाड़ की हँसी) – डॉ अनमोल कुमार

ऊँचे शिखर से कूद पड़ा वो मतवाला, चट्टानों से टकराता, गाता गीत निराला। मोतियों-सा बिखरता, चाँदी-सा चमकता, धूप से खेलता, इंद्रधनुष रचता। नाम है उसका झरना, पहाड़ों की संतान, अविरल…

जून का महीना – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

जून का महीना आया है, तपता सूरज छाया है। धरती तपती अंगारों सी, गरम हवा का साया है। पेड़ खड़े हैं मौन थके से, पंछी ढूँढ़ें ठंडी छाँव। नदियाँ भी…

छोटे किसान-मजदूर की व्यथा – सीमा शुक्ला

आज कवि मन कह रहा है कुछ व्यथा उनकी लिखूँ मैं , दर्द   मे  जीते  सदा  जो कुछ कथा  उनकी लिखूँ मै । अन्नदाता  एक  पल ,करते नही   विश्राम  हो …

पर्यावरण – सुनील गुप्ता

( 1 ) मौन पुकार सुनें हर वृक्ष की.., दें उन्हें प्यार !! ( 2 ) बचा प्रकृति स्वयं को ही बचाएं.., खिलाएं कृति !! ( 3 ) वन श्रृंगार…

संपूर्ण क्रांति दिवस – डॉ अनमोल कुमार

बिहार की माटी का वो लाल, अन्याय के आगे हुआ न हलाल। अंग्रेज गए पर कुर्सी के चोर, जनता भूखी, नेता सिरमौर। तब पटना के गांधी मैदान से, एक सिंह…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

खुला है दर रफाकत का,रहेगी दोस्ती कब तक?, निभाएगे सदा मिलकर रहे ये दोस्ती कब तक।   सुनो ऐ चाँद सा चेहरा दिखा देते हमे जाना, तुम्हारी राह देखेगी हमारी…