नन्हा दर्शक – डॉ.प्रियंका सौरभ

टीवी पर दुनिया नई, नन्ही-नन्ही आँख। ज्ञान, हँसी, कल्पनाएँ, भर दें मन में पाँख॥   सोफ़े पर बैठा हुआ, देखे ध्यान लगाय। रंग-बिरंगी हर कथा, मन में खुशी जगाय॥  …

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

ल़ोग करते बस ग़रीबों पर कहर हैं, आज के अख़बार की ताजा ख़बर हैं।   आरजू मेरी तुम्हें बाँहों मे भर लूँ, यार आँखो मे बसे तेरा श़हर है।  …

काश ऐसा होता – श्याम कुंवर भारती

जब बना लिया दुनिया को अपना अदावत किससे करे। रहा न कोई दोस्त या दुश्मन फिर बगावत किससे करे।   चार दिन की जिंदगी चलो सबसे प्यार मेरे यार कर…

डॉ. राजश्री वर्मा के रहस्य-रोमांचक उपन्यास ‘तीसवाँ द्वार’ का भव्य विमोचन राजेश वर्मा ने किया

vivratidarpan.com जमशेदपुर ( झारखंड) । समकालीन हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में चर्चित रहस्य-रोमांचक उपन्यास ‘तीसवाँ द्वार’ का भव्य विमोचन प्रख्यात पत्रकार एवं समाजसेवी राजेश कुमार…

भोजपुरी गजल – श्याम कुंवर भारती

नाम तोहार लेके,  दिल अब आबाद हो गईल | कहलू की केवन पागल , हमार आज हो गईल |   आसरा लगवली तोहसे ,नजर हमसे फेर लिहलु | छुटल न…

 इमोजी – सुनीलानंद 

( 1 )” ई “, ईजाद ‘इमोजी’, का हुआ जबसे.., संदेशों में नई जान है आई !! ( 2 )” मो “, मोहब्बत ‘इमोजी’, से हुई हमें.., मन को कला…

स्त्री – रुचि मित्तल

एक स्त्री के चेहरे को देख कर सुबह ने अपनी जल्दबाज़ी छोड़ दी है आँखें… किसी शांत झील की तरह जहाँ आसमान बिना शोर किए अपनी परछाईं रख देता है…

गीत — जसवीर सिंह हलधर

चैतन्य तरुण हो गयी धरा ,जब से मेघा जल बरसाये । कोयल ने राग विरह छोड़ा, मल्हार राग फिर दुहराये ।   धरती ने मैल क्षरण करके, देखो नव यौवन…

हरेला – डॉ क्षमा कौशिक

आज हरेला पर्व है हरियाली  त्योहार। वृक्ष लगाकर कर रहे, धरती का श्रृंगार । पर्व मनाने  मात्र से, नही बनेगी बात। वृक्षों का संरक्षण हो, तभी बनेंगी बात। वृक्षों की…

बेबस बेटी – सुनील गुप्ता

( 1 ) बेबस बेटी वो गंगानगर की.., रोयी तड़पी !! ( 2 ) नर पिशाच बत्तीस शैतानों ने.., आत्मा कुचली !! ( 3 ) पांच दिनों में सैकड़ों बार…