सोशल मीडिया की हर रील में एक हँसी गूंजती है — खिलखिलाती, सच्ची, जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश। वह हँसी अरुण की है… तेलंगाना की धूप में तपे एक…
महक उठे धरा पर खुशबू , और खुशियों की बरसात हो । चैत मास के पावन महीना, नव वर्ष की शुरूआत हो।। सत्य सनातन हो तन-मन में, तो दुश्मन…
मैं शून्य पर खड़ी थी अहसास गहरे थे पर जमीन अपनी न थी कहने को तो सब अपने पर कोई अपना न था शून्य से शुरू की जिंदगी कुछ खोने…
चाँद पर हो आशियाँ जहाँ सिर्फ मैं और तुम हो और दूसरा कोई बंधन न हो जहाँ रास्ते कदमों से नहीं नियत से खुलते हों जहाँ नाम आवाज़ न माँगे…
लोग समझते हैं ये घाव देता है पर सच कहूँ ये तो मेरे कंधे पर हाथ रखकर चलता रहा है बरसों। मैं अक्सर मुस्कुराती दिखती हूँ पर मुस्कान की तहों…
उदासी क्यूँ अरे मन देख, पतझर बीत जायेगा। लिए झोली भरी रँग की, पुनः मधुमास आयेगा।। गिरेंगी पत्तियाँ सूखी, नवल तरु को सजायेंगी। नया धर रूप शाखों पर, कली फिर…
धूप कारागार में नकली उजाले रह गए । हाशिए पर आम जनता के हवाले रह गए । बात थी अधिकार के उपयोग की मतदान में , पर यहां तो…
आज मिलता है कहाँ सब कुछ नसीबों से। करनी पढती है मशक्कत आज लोगों से। चाँद भाता आज भी अपनी अदाओ से। खूबसूरत वो लगे हमको निगाहों से। …
( 1 ) है पुण्यकारी मेष संक्रांति पर्व., मंगलकारी !! ( 2 ) यह संयोग शिववास का योग., जगाएं जोग !! ( 3 ) करें प्रार्थना सूर्य की उपासना., ध्यान…
बतिया न बनईह गोल गोल हे पिया होलिया में अईह । बाली उमरिया हो नाजुक बदनिया बहेले फगुनी बयार हमरी ओर हे पिया होलिया में……। अइले फगुनवा हो…