विडंबनाओं का आइना है ‘मेरे राम सबके राम’ – डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’

vivratidarpan.com – ‘मेरे राम सबके राम’ पुस्तक श्री राम के बहुआयामी व्यक्तित्व उनके आदर्शों और सार्वभौमिक संदेश को सरल , सुबोध एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है । सुधीर…

अंतर्मन की पुकार – सविता सिंह

क्यों द्रवित हुआ है अंतर्मन, क्यों व्यथित हमारा हुआ हृदय। क्या नेह किये थे असीमित, क्यों किया किसी ने ये अनय? न गरल मिले किसी मीरा को, न नयनों से…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

सुना सच जो दिल का जता कर चले। बुलाती रही,शब (रात) बिता कर चले।   गुजारी  हैं रातें भुला कर तुम्हें, सो तुम हमसे मुँह भी छुपाकर चले।   मैं डूबी…

काश! मैं बादल होता – विवेक रंजन श्रीवास्त

vivratidarpan.com – कविता के लिए हमेशा किसी असाधारण घटना की जरूरत नहीं होती। एक खाली मेज़, उड़ती पतंग, पहली बारिश की खुशबू, किसी मित्र की स्मृति या मन में उठती…

कुलपति चयन: विद्वता का सम्मान या जुगाड़ का पुरस्कार? – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com देश में उच्च शिक्षा के नाम पर अनेक राजकीय और निजी विश्वविद्यालय स्थापित हैं। मंडल स्तर पर स्थापित राजकीय विश्वविद्यालयों में कुलपति का मनोनयन सम्बंधित प्रदेशों के राज्यपाल द्वारा…

अश्रुधारा -आचार्य अवधेश झा

काठ काठ से आग जला दो बाबू जी ! सावन की बरसात भगा दो बाबू जी!! बचपन भर कोड़े कांधे पे रखते थे बाबू जी मेरे कभी न थकते थे…

पूर्णिका (दुनियादारी) – श्याम कुंवर भारती

कौन कहता है जो गिरता है वो फिर संभलता नहीं है। ऐसा देखा  है गेंद गिरे जमीन पर और उछलता नहीं है।   आसमान में उड़ो मगर पाव जमीन पर…

सशक्त हस्ताक्षर की 52 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न

vivratidarpan.com  जबलपुर – सशक्त हस्ताक्षर की 52 वीं काव्य गोष्ठी पी एम श्री महाकौशल महाविद्यालय जबलपुर में बड़े हर्ष के साथ दिनांक 19.09.2026 को सम्पन्न हुई । सर्वप्रथम संस्थापक गणेश…

​ श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

कृष्ण बसे जब से मन में तब से दिल को कुछ और न भाता। गोपन गोपिन भाँति बसी छवि चित्त वहीं नित दौड़ लगाता। नैन निहार रहे दिन रात अदृश्य…

धड़कता हुआ दिल – रुचि मित्तल

धड़कता हुआ दिल किसी इमारत पर रखी अज़ान नहीं है कि सब सुन लें वह तो सीने के अंधियारे में जलती हुई एक छोटी-सी लौ है जो हर धड़कन पर…