मेहंदी के पत्ते चुपचाप हँसते,
हरियाली में अपने रंग को रचते।
कोमल डाली पर सपने सजाए,
धूप में भी ठंडी छाया बन जाए।
हाथों की रेखा में गीत उतारे,
मन के कोनों में चुपके से उतरे।
पीसकर जब ये रंग बिखरते,
सफेद हथेली पर चाँद उतरते।
सुगंध इनकी बात पुरानी,
छू ले जैसे दादी की कहानी।
हर पत्ता एक राज छुपाए,
स्नेह का रंग धीरे फैलाए।
न बोले फिर भी सब कह जाते,
मौन में रिश्तों को महकाते।
मेहंदी के पत्ते यूँ ही नहीं,
हरियाली में प्रेम लिख जाते यहीं।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम ,छत्तीसगढ़
