अभी मंजिल नहीं चाहत, सफर कुछ देर चल जाए, पता चल जाएगा हमको, यहाँ पर कौन भटकाए, करें मीठी सभी बातें, मगर पीछे न जाने क्या? चलो छोड़ो अजी मीरा,…
Category: मनोरंजन
जीतिया पर माँ की भावना – डॉ अनमोल कुमार
नहा खा कर व्रत धरा, निर्जला है आज, जीतिया का नेम है, पुत्र की है लाज। न अन्न का दाना लगे, न पानी की बूँद, बस मेरे लाल की लगे,…
