ग़ज़ल – रीता गुलाटी

अब स़ज़ी है ये म़ह़फिल भी आऐ सभी। रौनकें आज़ महफिल बढाऐ सभी।मतला   आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये। जान अपनी हमेशा लुटाऐ सभी।,   साज छेडो पिया तुम…

वह चले गए – रेखा मित्तल

कुछ अधूरा-सा वह चले गए चारों तरफ असीम शांति मौन-सा पसरा हुआ ऐसे लगा कुछ छूट गया बहुत कुछ कहना था सब कुछ अधूरा रह गया अब कभी नहीं मिलेंगे…

कृष्णा कन्हैया – डॉ क्षमा कौशिक

कर नयन चंचल मधुर वंशी बजाता है। छेड़ कर रस रागिनी मन को चुराता है।। सिर-मुकुट पट-पीत कटि किंकिण गले माला। साँवरे ये रूप तेरा मन लुभाता है।। तट कभी…

सूर्य प्रभा – शिप्रा सैनी

अंक में समेट लें प्रभा ह्रदय पुकारता। प्रफुल्लता प्रकाश दे, प्रणम्य यह उदारता।   दिग दिगंत दिव्य सूर्य की छटा समान है। दीन को महंत को सहर्ष ओज दान है।…

जय जिनेन्द्र – सुनील गुप्ता

( 1 ) जय जिनेन्द्र हृदयसे नमन.., शुभ प्रभात  !!   ( 2 ) हर दिवस करें देवदर्शन.., पाएं आनंद  !!   ( 3 ) हो शुरुआत प्रत्येक दिवस की..,…

भईया नहीं भूलना (रक्षा बंधन) – श्याम कुंवर भारती

सदियों से भाई बहन का रिश्ता ईश्वर का उपहार है। भईया नहीं भूलना यही बहना कि पुकार है।   तुम रहना जहाँ भी हरदम मुझको याद करना । दुख हो…

प्रकृति का कहर — क्षमा कौशिक

हाहाकार मचा हुआ है, बादल कैसा बरस रहा है। रूप काल का धारण करके, क्रोधित होकर बरस रहा है।।   प्रलयंकारी बादल को देखो, बरसते ही जा रहे हैं। राह…

श्रावण माह में शिवार्चन (17)- (श्री जागेश्वर जी, कानपुर) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

नगर कानपुर गंग किनारे, श्री जागेश्वर धाम है। रंग बदलते शिव विग्रह का, दूर-दूर तक नाम है। किवदंती कहती ब्रह्मा ने, स्थापित कर यज्ञ किया था, श्रद्धा से दर्शन जो…

गजल – ऋतु गुलाटी

लहू से सींच कर अपने शहीदों ने निखारा है। हमारी जान से ज्यादा हमें ये देश प्यारा.है।   लगे प्यारा हमे भारत,जगत मे सबसे न्यारा है। ये धोता पाँव पर्वत…

विभाजन विभीषिका – जसवीर सिंह हलधर

रात आधी का बुरा इतिहास भी है । ऐक ऐसा दर्द दिल के पास भी है ।।   कौम के दो फाड़ होने की मुसीबत । ख़ून से हमने अदा…