ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आपको देख कर सिहर जाते, इतनी हो हूर हम ठहर जाते।   यार मुद्दत के बाद तुम आये, तेरे बिन यार हम किधर जाते।   यार उल्फत हुई है अब…

रात रानी महकी – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

रातरानी महकी चांदनी रात में, जैसे कोई गुप्त कहानी बात में। शीतल पवन ने धीरे से छू लिया, मन खो गया उस मधुर सौगात में। चांद ने ओढ़ी दूधिया चादर,…

हमेशा साथ रहूँगा – रुचि मित्तल

आज उसने कहा “मैं हमेशा साथ रहूँगा।” उसके “हमेशा” में वाई-फाई की रेंज जितनी दूरी थी। मैंने पूछा अगर बैटरी लो हो गई तो? वो बोला “पावर बैंक रखूँगा।” रिश्तों…

क्षण भंगुर जीवन – डॉ अनमोल कुमार

जन्म लेकर इंसान इस धरती पर आता है, पर कितनी लंबी होगी उसकी यात्रा, यह कोई नहीं जानता। आज साँसों का कारवाँ चल रहा है, कल कौन समय की गोद…

गंगांजलि साझा संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी को भेंट किया – कवि संगम त्रिपाठी

vivratidarpan.com जबलपुर – गंगांजलि साझा काव्य संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर को उनके जबलपुर आगमन पर सौजन्य मुलाकात कर कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया। राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर वरिष्ठ…

राष्ट्रीय पाठन दिवस (19 जून) – डॉ अनमोल कुमार

किताब का एक पन्ना पूरी दुनिया घुमा लाता है, बिना टिकट, बिना पासपोर्ट दिल को आकाश दिखा जाता है। क्यों मनाएँ पाठन दिवस? 19 जून को जन्मे थे पी.एन. पणिक्कर…

आओ, याद करें – सुनील गुप्ता

( 1 ) आओ याद करें, बीती बिसरी, मधुर स्मृतियाँ !!   ( 2 ) याद करते फ़िरसे, उन पलों में, खोजें खुशियाँ  !!   ( 3 ) करें मुलाक़ात…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

प्यार करते बड़ा, मान जाना पड़ा, दर्द अपना हमें, सब भुलाना पड़ा।   सात जन्मों का तेरा मेरा साथ है, प्यार अपना मुझे फिर जताना पड़ा।   इश्क होता फरेबी…

वो अंगनाई क्यों हुई पराई – नीलांजना गुप्ता

मेरा रिश्ता जोड़ दिया दूजे आँगन से ओ बाबुल क्यों हुई पराई अब भी याद आती हैं मुझको वो गलियाँ वो अंगनाई क्यों हुई पराई भूल गए क्यों मैं भी…

जेठ माह – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

नाम जपें हनुमान सभी जन जीवन जो करता सुखकारी। ध्यान धरें नित पाठ करें दिल में रख के बस भक्ति तुम्हारी। अष्टक, बाण, चलीस पढ़ें पढ़ना जिनका अति है गुणकारी।…