अरि दल थर-थर काँप उठे थे, रण में जब हुंकार हुई, मेवाड़ों के सिंह प्रतापी की फिर जय-जयकार हुई। हाथों में थी तेज तलवारें, आँखों में अंगार लिए, मातृभूमि की…
अंजनी के पुत्र आप, दूर करें कष्ट ताप. बल बुद्धि है असीम बड़े गुणवान हैं। सर्वश्रेष्ठ राम भक्त, व्यर्थ नहीं करें वक्त, रघुवर के कार्य को करते प्रयाण हैं।…
मनुष्य हूँ मैं… मुस्कान ओढ़े फिरता हूँ, भीतर कितने तूफ़ान हैं, ये किससे कहता हूँ? भीड़ में रहकर भी अक्सर खुद को तन्हा पाता हूँ, हँसी के पीछे छुपे दर्द…