दस्तक दो इस बार सखे – सविता सिंह मीरा

तुम बिन सूना मन का आँगन, बन जाओ झंकार सखे ! साँसें तुमको ढूँढ रही हैं, कर लो अब स्वीकार सखे ! मौन समर्पण की यह बेला, तुमको ही आवाज़…