वंदन तुझे, हे श्रमवीर! वंदन तुझे, हे श्रमवीर!! अंबर छूते शिखर सभी ये, तेरी ही पहचान, तेरे श्रम की रेखाओं से, रचता नव निर्माण। भट्टियों की ज्वाला बोले, तेरी ही…
श्रम की कीमत क्या होती है, इसको लें हम सब पहचान। मेहनतकश मजदूर श्रमिक का, मिलकर रखें सदा हम ध्यान। चींटी भी श्रम करती दिनभर, दाना-दाना चुनती है। बिना रुके…
vivratidarpan.com जमशेदपुर,(अनमोल कुमार।) जमशेदपुर में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में प्रख्यात समाजसेवी एवं ‘बिहार दिन रात’ के ब्यूरो चीफ़ राजेश कुमार वर्मा के करकमलों द्वारा डॉ. राजश्री वर्मा द्वारा लिखित…
vivratidarpan.com – समीक्ष्य संग्रह ‘खोज लें हम सत्य’ डॉ रवीन्द्र वर्मा की कृति समय का आईना सरीखी गीतिका की लयबद्धता, गीतों की समरसता और मुक्तकों के वैचारिक चिंतन से मानव…