जीवन बंजर रेत – डॉ. प्रियंका सौरभ

जब दौलत की लालसा, बाँटे मन के खेत। ठूँठा-ठूँठा जग लगे, जीवन बंजर रेत।।   रिश्तों वाले गाँव में, घूम रहे अब प्रेत, जीते-जी इंसान सब, होते जाते श्वेत। चेहरों…

ग़ज़ल – नीलांजना गुप्ता   

नगर बसते जा रहे हैं दिल उजड़ते जा रहे हैं, दुनियाँ रोशन हो रही उर दीप बुझते जा रहे हैं,   क्या गिले शिकवे करें किसने हमको आकर लूटा, दोस्तों…

बॉलीवुड के स्वयंभू मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के दोहरे मापदंड – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – आज आपको अभिनेता आमिर खान का टीवी शो सत्यमेव जयते याद दिलाते हैं जिसमें वह हिन्दू मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए आलोचना कर अपना ज्ञान बांटते थे…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

चले आओ,स़नम मेरे, मुहब्बत ही दुआ भी है, तुम्हें पूजा सदा मैने मुहब्बत वो ख़ुदा भी है।   हुआ सूना ये मन कौना तुम्हे हरदम पुकारेगे, मिलोगे तुम हमे जब…

आशा की किरण – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

अँधियारे के आँगन में, एक रेखा उजियारी, चुपके से आ बैठी, बनकर नई सवारी। टूटे हुए सपनों की, धूल अभी बाकी थी, उसमें ही चमक उठी, जैसे कोई ज्योति पावन…

सफर – राजेश कुमार झा

संदर्भ भी छूट जाएगा, शहर भी छूट जाएगा। जहां हम पैदा हुए थे,वो दर और घर भी छूट जाएगा।। छूट जाएगा वो हर रिश्ता , अपनो और बैगानो से। जिस…

बदल गया इंसान (लघुकथा) – डा. सहदेव बालियान

vivratidarpan.com – ज्येष्ठ महीने की चिलकती धूप वाली तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई थी.सुबह शाम क्यारी के पेड़-पौधों की सिंचाई करने से मिट्टी में नमी और ठंडक बनी रहने…

बदल मत जाना – रुचि मित्तल

बदलते मौसम से बदल मत जाना यह जो हवा का रुख है यह तुम्हारी दिशा तय करने नहीं आया। धूप का तेज होना तुम्हारी सहनशक्ति की परीक्षा है। छाँव का…

मुखौटे – सुनील गुप्ता

( 1 )” मु “, मुख पर लगाए घूम रहे मुखौटे, पहचानें कैसे, यहाँ आदमी सच्चे !!   ( 2 )” खौ “, खौफ़ खाए लगें डरावने ये मुखौटे, इनसे…

शिव विवाह – श्याम कुंवर भारती

चंद्रमा शिखर शिव जटा बीच गंग है बड़ा शोभत। गले भुजंग भभूत सब अंग कर डमरू है बाजत ।   बिगड़ी बनाए योगी कहलाए शिव बड़े है भोले भाले हे…