हम हैं बिहारी- सविता सिंह

हमको बहुत खीस बड़ता है, और कभी मन अनसा भी जाता है, लेकिन जब दुआरे कोई आ जाता है, बिना चाय पिए, पकौड़ी खिलाए—नहीं भेजा जाता है। और उतने पे…

माँ कात्यायनी वंदना – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

स्वर्ण प्रभा सी ज्योति लिए, सिंहासन पर विराजी हो, ऋषि कात्यायन की तपस्या से, धरती पर तुम आई हो। कर में कमल, कर में तलवार, रूप अनोखा धारण किया, अधर्म…

कविता – सुनील गुप्ता

( 1 ) कविता मन भावों की, है बहती सरिता ! चले सदा हर्षाए.., हँसाए गुदगुदाए कविता !! ( 2 ) कविता स्वान्तः सुखाय की, है अद्भुत गाथा ! प्रतिपल…

जल की महत्ता – प्रवीण त्रिपाठी

जल जीवन है जल संबल है जल सबका आधार जल परिवर्तन जल घर आँगन जल की शक्ति अपार कल कल करता निर्मल बहता जल से ही संसार कूप बावड़ी ताल…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

मुहब्बत को बया करके हकीकत को बताएगा। छिपी जो आरजू दिल मे, वही हमको सुनाएगा।   नशा तेरी मुहब्बत का लगा चढने हमारे सर। मिले जो साथ बस तेरा सदा…

गौरैया की पुकार – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

छोटी सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया, आँगन में गूंजे उसकी मधुर मुरैया। फुदक-फुदक कर दाने चुनती, हर पल अपनी दुनिया बुनती। कभी छज्जे पर, कभी पेड़ की डाली, उसकी चहक…

हँसी जो उम्मीद बन गई – अमित कुमार

सोशल मीडिया की हर रील में एक हँसी गूंजती है — खिलखिलाती, सच्ची, जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश। वह हँसी अरुण की है… तेलंगाना की धूप में तपे एक…

हिंद नव वर्ष – बसंत श्रीवास

महक उठे धरा पर खुशबू , और खुशियों की बरसात हो । चैत मास के पावन महीना, नव वर्ष की शुरूआत हो।।   सत्य सनातन हो तन-मन में, तो दुश्मन…

शून्य – डॉ रेखा मित्तल

मैं शून्य पर खड़ी थी अहसास गहरे थे पर जमीन अपनी न थी कहने को तो सब अपने पर कोई अपना न था शून्य से शुरू की जिंदगी कुछ खोने…

चाँद पर हो आशियाँ – रुचि मित्तल

चाँद पर हो आशियाँ जहाँ सिर्फ मैं और तुम हो और दूसरा कोई बंधन न हो जहाँ रास्ते कदमों से नहीं नियत से खुलते हों जहाँ नाम आवाज़ न माँगे…