आओ बादल गाँव हमारे – हरी राम यादव

  आओ बादल गाँव हमारे, तुमको खेतिहर रोज पुकारे। बिन बूंदों के खेत सूख रहे, निराशा उपज रही सकारे। मंहगे  मंहगे  बीज खरीदे, खाद के लिए हाथ पसारे। जैसे-तैसे धान…

त्रेता युग में जब त्रिपुरारी – मधु शुक्ला

  कुंभज ऋषि ने कथा सुनाई। बहु विधि कीन्हे राम बढ़ाई।। हर्ष गहे हैं सुन त्रिपुरारी। चकित हुईं हैं दक्ष कुमारी।।   भ्रमण करें जो वन में रोते। प्रिया हेतु…

प्रो.नामवर सिंह के जन्मदिवस पर आयोजित हुआ काव्य समारोह

  utkarshexpress.com गाजियाबाद (कुमार संदीप) – नारायणी साहित्य अकादमी एक ऐसा मंच है जहां साहित्य से जुड़े नवांकुरो को प्रोत्साहन के साथ एक बड़ा मंच भी मिल रहा है। नारायणी…

ये कविता नहीं – दीपक राही

  ये कविता नहीं, ये वो चीख़ है — जिसे कोई सुनता ही नहीं।   ये तूफ़ान नहीं, ये वो आवाज़ है — जो मज़लूमों के हक़ में उठती है।…

जै कारगिल – सुनील गुप्ता

जै कारगिल चलें गाथा सुनाते., वीर प्रफुल्ल !!1!! वीरों नमन श्रद्धा भाव चढ़ाते., आँखें सजल !!2!! साठ दिवस बर्फ़ीली दिन रातें., कठोर पल !!3!! अदम्य शौर्य वो आनन मुस्काते., मन…

सावन को आने दो – प्रियंका सौरभ

  सावन को आने दो, बूँदों को गाने दो, मन के सूने कोनों में हरियाली छाने दो।   भीगी धूप में खिलती मुस्कानें हों, तन क्या, मन भी तनिक भीग…

आजादी के बाद भी – गुरुदीन वर्मा

  (शेर)- किसको पसंद है यूँ अपनी जिंदगी को, दोज़ख बनाना। मगर हालात कभी ऐसे होते हैं, आदमी मुजरिम बन जाता है।। यूँ तो चाहते हैं सभी कि, वो किसी…

धन रोपनीया ये बालम – श्याम कुंवर भारती

  हमसे ना होई धन रोपनिया ये बालम। ननद मोर झलकावेली नथुनिया ये बालम।   खेतवा में सगरो लबालब पनिया भरल बा। कादो माटी सनाइल गोड़वा ओढनिया सनल बा। बरखा…

चाँद – अंजू लता

  झटपट चल देता है सुबह- शाम को घर आ जाता है, रात के लंबे लम्हों में वह- खुद से खुद बतियाता है. मैं ‘धरती माँ’ममतामयी उससे गहरा नाता है……

ओम् नमः शिवाय – क्षमा कौशिक

  दूर  दूर से काँवड आये, परम सुपावन काशी में। मन में दृढ़ विश्वास जगाये, गोपेश्वर अविनाशी में।।   प्रेम भक्ति जल गागर लेकर, लोग शिवालय आते हैं। दूध दही…