जय गौरीशंकर – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  जटा गंगधार बहे अर्द्ध चंद्र शीश सजे, चर्म वस्त्र अंग सोहें मस्तक विशाल है।   आभूषण बिच्छू-सर्प, हर लिया सर्व दर्प, नाग का कंकण हाथ लगता कमाल है।  …

ग़ज़ल – रीता गुलाटी.

  भीख माँगे रास्तों पर हाथ फैलाते मिले, गोद मे बच्चे हैं उनके बोझा वो ढोते मिले।   मस्त होता आशिकी मे,ये जहाँ प्यारा लगे, राह के पत्थर भी हमको,गीत…

प्रेम भरी बातें – सविता सिंह

  तुम्हारी यह प्रेम भरी बातें न जाने क्यों मुझमे प्रेम नहीं भर पाती। मत कहो तुम प्यार करते हो आई लव यू ये शब्द हमें लुभाते नहीं। यह ढाई…

गुरु पूर्णिमा व (असाढ़ी) – प्रवीण त्रिपाठी

गुरु की महिमा बड़ी महान। गुरु चरणों में मिलता ज्ञान।। बतलाते रहस्य अति गूढ़। ज्ञानी बन कर निखरे मूढ़।। गुरु में भरा ज्ञान भंडार। मन में भरते शुद्ध विचार।। संस्कारों…

तुम मिलो तो सही – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) तुम मिलो तो सही, दिल से कहें…., सुनें जानें बातें अनकही !!   ( 2 ) तुम झुको तो सही, छुएं उत्तुँग शिखर…, आसमां पे चढ़के…

बचपन का राग – डॉ. सत्यवान सौरभ

  बचपन का राग, हँसी की बहार, फूलों सी खुशबू, रंगों की बौछार। नन्हे कदमों की दुनिया बड़ी, सपनों की पगडंडी, हर पल नई।   चिड़ियों की चहचहाहट, तितली का…

क्या हुआ – दीपक राही

  क्या हुआ है, कुछ भी तो नहीं हुआ।   क्या चल रहा है, कुछ भी तो नहीं चल रहा हुक्मरानों के बीच।   क्या बदला, कुछ भी तो नहीं…

चंडी छ्न्द (घर सावन आये)  – अनिरुद्ध कुमार

  बिरह बदन झकझोर सताये। सजल नयन मन पीर जताये।। तपन लहर तकदीर बुझाये। सजन अवन कहके भरमाये।।   उमड़-घुमड़ बदरा मडराये। गरज-गरज मनमीत बुलाये।। चमक-दमक चितके अकुलाये। डकर-डकर नित…

“चूल्हे से चाँद तक”— चूल्हे की आँच से चाँद की कविता तक की यात्रा –  सोनल शर्मा

Vivratidarpan.com – प्रियंका सौरभ का यह काव्य संग्रह ‘चूल्हे से चाँद तक’ केवल कविता नहीं, स्त्री आत्मा की यात्रा है। यह वह आवाज़ है, जिसे सदियों से दबाया गया, पर…

सत्ता को सदैव असहज करता है सच्चा व्यंग्य – विवेक रंजन श्रीवास्तव 

vivratidarpan.com – व्यंग्य साहित्य और कला की वह धार है जो समाज की कुरीतियों, अत्याचारों और विसंगतियों को लक्ष्य करती है। परंतु जब यही तीखापन सत्ता, धर्म या स्थापित ताकतों को…