चौपाल की नई सुबह – प्रियंका सौरभ

  चौपालों की धूल भरी सांझ में, उठी एक आवाज़ — भीगी, मगर तेज़। “ना अब घूंघट की जंजीरें, ना सपनों पर कोई संदेश।”   धर्मपाल के होंठों से फूटा…

एहसास – ज्योति श्रीवास्तव

  रिवाजों का कैसी  रस्म  है बनाई, सही माँ ने बेटी की हरदम जुदाई।   जो आंगन में खेली चहकती हुई सी, कभी मुस्कुराती कभी खिलखिलाती।   पहन पैजनिया जो…

पलायन क्यों? – डॉ क्षमा कौशिक

आज चर्चा हो रही है, हर गली हर गाँव में। क्यों पलायन हो रहा है, आज अपने ठाँव में।। क्या महज धन की ललक में, छोड़ दी अपनी धरा। या…

भारत-नेपाल रूबरू साहित्य उत्सव की शानदार पहल- इरशाद राही

vivratidarpan.com – प्रिय साहित्य प्रेमियों, कवियों और लेखकों,हमें अत्यंत हर्ष और गर्व के साथ सूचित करना है कि आगामी भारत-नेपाल रूबरू साहित्य उत्सव में विशेष अतिथि के रूप में माननीय…

ऑपरेशन सिंदूर सेना के पराक्रम पर आभाषी कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

vivratidarpan.com – कहानिकां हिन्दी पत्रिका के उत्तराखंड अध्याय द्वारा गूगल मिट पर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और भारतीय सेना के पराक्रम पर सेना को बधाई देने के उद्देश्य से एक…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  झुक न पाये मौत को स्वीकार की। वो डरे ना आँख से खूँख्वार की।   जुल्म ढाते है जो अब बिन बात के, क्या जरूरत देश को मक्कार की।…

पति को समर्पित मैथिली रचना – प्रकाश राय

  हम्मर पिया गेल परदेस में, हमरा लेल दाल-रोटी कमाए। जखन उ परदेस से लौट के एथिन, चुपचाप हमरा दिल में समाय।   थक-हार के अहाँ आइब गेलौं, एक लोटा…

एक डिजिटल दौर की त्रासदी – डॉ सत्यवान सौरभ

  घर की बात थी, घर में रहती, अब कैमरे के आगे बहती। झगड़े भी अब स्क्रिप्ट हुए हैं, रिश्ते जैसे क्लिप्ट हुए हैं।   लाइव हुआ तो दर्द बढ़ा,…

हो गई अनबन – सुनील गुप्ता

  हो गई अनबन ख़ुद-ब-ख़ुद से, मन को समझाते…, मनाते, मन ही मन  !!1!!   हो गई तकरार तर्क-वितर्क करते, स्वयं से लड़ते…, भिड़ते करते बातें बेकार !!2!!   हो…

गहरी दोस्ती – जया भराड़े बड़ोदकर

  Vivratidarpan.com- साक्षी ने छुट्टियों में बहुत क्लासेज शुरू कर दी थी। उसे अपनी सारी फ्रेंड्स के साथ मिलकर डांस गाना सीखना था। सुबह वो जिम्नास्टिक में जाने लगी दोपहर…