हँसते हँसते जान देना देखना, इश्क मे सब कुछ लुटाना देखना। मुस्कुराकर खिलखिलाना देखना, प्रेम बाँटे प्रेम पाना देखना। जिंदगी मे सब लुटाना देखना, जान देगे, आजमाना…
vivratidarpan.com – आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) पर पिता दिवस /जन्मदिवस (डा. ओम ऋषि भारद्वाज) विषयक 40 वीं भव्य आभासी काव्य गोष्ठी का 10 जून’ 2025 आयोजन किया गया। गोष्ठी सायं 4:00…