प्रकृति का अनुपम उपहार निर्मल नदियां हुई अब मैली-मैली – प्रमोद दीक्षित मलय

vivratidarpan.com – नदियां भूतल पर प्रवाहित जलस्रोत मात्र नहीं हैं अपितु सभ्यता की जननी हैं, सांस्कृतिक परम्परा का पुण्य प्रवाह हैं। सतत प्रवहमान नदियां जीवन का उत्स है, ऊर्जा हैं,…

काश! मैं बादल होता – विवेक रंजन श्रीवास्त

vivratidarpan.com – कविता के लिए हमेशा किसी असाधारण घटना की जरूरत नहीं होती। एक खाली मेज़, उड़ती पतंग, पहली बारिश की खुशबू, किसी मित्र की स्मृति या मन में उठती…

प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र का सौ बर्ष पर उपलब्धि और चुनौतियों पर कार्यक्रम आयोजित

vivratidarpan.com मुंगेर। विभागीय ने वक्तव्य सह संवाद आयोजित किया गया। जिसका विषय ” प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र के उन्नयन के सौ वर्ष उपलब्धियां और चुनौतियां “का आयोजन किया गया।…