संयम – जया भराडे बडोदकर

Vivratidarpan.com – उठते ही लता ने सबसे पहले अपने लिए एक कप चाय बनाई और फिर बालकनी में बैठे बैठे सुबह सुबह की ठंडी हवा में लमहा लमहा चाय की…

बात दिल की दिल में रख – सुनील गुप्ता

( 1 ) बात दिल की दिल में रख, मत होने दे इसे जगजाहिर !! ( 2 ) गम पीए जा बाहर न उगल, हँसता है जग इसे जान इधर…

कविता समीक्षा (नव-प्रस्तावित ‘आइकू विधा’) – डॉ सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – डॉ ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत (अज्ञात मेघार्जुन जमदग्निपुरी) की नव-प्रस्तावित ‘आइकू विधा’ की कविता समकालीन संवेदनाओं की अभिव्यक्ति प्रतीत होती है, जिसमें भाव और विचार का संतुलन प्रमुखता…

पुस्तक – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

किताबें हैं दीपक ज्ञान के, अंधियारे में उजियारा भरती, हर पन्ना जैसे नई कहानी, जीवन को दिशा ये करती। शब्दों में सिमटी दुनियाएँ, सपनों को देती हैं उड़ान, मौन रहकर…

मौन गूँजता है – रेखा मित्तल

धरा से क्षितिज तक मौन का फलक विस्तृत है ध्वनियों की होती हैं कुछ विशेष तरंगें जो तय कर सकती हैं, इक निश्चित दूरी परंतु…मौन’ गूँज सकता है अनंत के…

पृथ्वी दिवस – सुनील गुप्ता

( 1 ) पृथ्वी है हमारी धरती माता, आओ इसका हम कर्ज़ चुकाएं !! ( 2 ) पृथ्वी से है हमारा अस्तित्व, आओ इसके पर्यावरण को बचाएं !! ( 3…

क्षुब्ध पर्यावरण – श्याम कुमार भारती

तप रहा है सूरज मिले कही पेड़ो की छांव नहीं। चिलचिलाती धूप में बचने का कोई ठाव नहीं । तालाब पोखर कुएं सांस आखिरी अब लेने लगे । मछलियों मेढक…

महिलाएं जीवन व्याख्या – कालिका प्रसाद सेमवाल

महिलाएं परिवार की रीढ़ होती है, महिलाएं जीवन की व्याख्या होती है।   महिलाएं त्याग तपस्या की मूरत होती है, परिवार के लिए जीवन होम कर देती हैं।   महिलाएं…

चलते-चलते – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

पुष्प खिले हैं हर कहीं, पवन बहे अति मंद। भँवरे आतुर हैं सभी, पीने को मकरंद।। छटा बिखेरें तितलियाँ, रंग-बिरंगे फूल। खग छेड़ें  स्वर लहरियाँ, पा मौसम  अनुकूल।। <> आदमी…

मेरा मन उड़ता परिंदा – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मेरा मन उड़ता परिंदा, नभ से बातें करता, बिन पंखों के ही जाने, कितनी दूर उतरता। कभी बादलों की बाहों में, सपनों को सजाता, कभी धूप की सीढ़ी चढ़कर, उजियारा…