महिलाएं जीवन व्याख्या – कालिका प्रसाद सेमवाल

महिलाएं परिवार की रीढ़ होती है,

महिलाएं जीवन की व्याख्या होती है।

 

महिलाएं त्याग तपस्या की मूरत होती है,

परिवार के लिए जीवन होम कर देती हैं।

 

महिलाएं संस्कृति की पोषक होती है,

महिलाएं बागों  में  बहार  होती है।

 

महिलाएं अबला नहीं सबला होती है,

महिलाएं हमेश मर्यादा में रहती है।

 

महिलाएं हिमालय की शिखर होती है,

महिलाएं गंगा  सी पवित्र होती है।

 

महिलाएं कुल का  गौरव  होती है,

महिलाएं संस्कृति, संरक्षक होती है।

 

महिलाएं जीवन की बगिया होती है,

महिलाएं ही अपना वंश  बढ़ातीं है।

 

महिलाएं शक्ति और सम्बल होती है,

महिलाएं  वैदिक  ऋचाएं होती है।

 

महिलाएं लक्ष्मी, सरस्वती होती है,

महिलाएं कभी रणचण्डी हो जाती है।

 

महिलाएं भोर की किरणें होती है,

महिलाएं धर्म न्याय का गान करती है।

– कालिका प्रसाद सेमवाल

मानस सदन अपर बाजार

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड

 

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