ग़ज़ल – रीता गुलाटी

शब भर के उनको देखूँ सितारा नही मिला,

टूटा है आज दिल भी वो चेहरा नही मिला।

 

तड़पा बड़ा था यार दिलासा नही मिला,

खाता रहा मैं ठोकरें सहारा नही मिला।

 

जलता है अपनी आग मे सूरज भी देखिये,

दुनिया मे कोई है जिसे धोखा नही मिला।

 

हमने भी की हैं बंदगी उनको खुदा समझ,

लेकिन करेगे प्यार वो मौका नही मिला।

 

हर शक्स उलझनों से गुजरता जरूर है,

डूबा था मुश्किलों मे किनारा नही मिला।

 

कैसे रहेगा खुशी से जो मुफलिसी मे है पला,

खोजा था उसने काम को थोड़ा नही मिला।

 

मुद्दत के बाद तुम मिले रहबर से बस दिखे,

समझे है *ऋतु भी मुंसिफ शिवाला नही मिला।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

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