गोकर्णा में शंकर जी की, बड़ी अनूठी शान है।
गंगावली और अघनाशिनि, संगम बहूत महान है।
गाय कर्ण से शिव जी प्रकटे, नाम इसी से उपजा था,
महाबलेश्वर कहलाते प्रभु, जग करता गुणगान है।
(श्री मुरुदेश्वर, उत्तर कर्नाटक) –
कर्नाटक में सागर तट पर, वृहद मूर्ति है शंकर की।
आत्मलिंग से है सम्बंधित, छवि अनुपम अभयंकर की।
पद्मासनरत शिव की प्रतिमा, मीलों से दिख जाती है,
अति उतुंग गोपुरम-शिवालय, जय-जय हे क्षेमंकर की।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
