vivratidarpan.com हरिद्वार (कुमार संदीप) । देवभूमि हरिद्वार की पावन धरा पर गंगा की अविरल धारा और साहित्य की निर्मल चेतना के मध्य आयोजित द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ का दो दिवसीय भव्य आयोजन विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक गतिविधियों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षाविदों, संत-महात्माओं, शोधार्थियों, कवि-कवयित्रियों, समाजसेवियों एवं संस्कृति-साधकों ने सहभागिता कर इसे अंतरराष्ट्रीय गरिमा प्रदान की।
दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का मूल उद्देश्य साहित्य एवं संस्कृति के माध्यम से सामाजिक चेतना को प्रखर करना तथा मां गंगा, सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और मानवीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सार्थक विमर्श को मंच प्रदान करना रहा।
प्रथम दिवस-चार सत्रों में विचारों का मंथन – महोत्सव के प्रथम दिवस का शुभारंभ गरिमामय उद्घाटन सत्र से हुआ। मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक रहे। अति विशिष्ट अतिथि प्रो. शिशिर पाण्डेय, कुलपति रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट तथा लोकपाल वर्मा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, उच्च न्यायालय उत्तराखंड की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की।
विशिष्ट अतिथि स्वामी आशुतोष जी महाराज, मोटिवेशनल स्पीकर तथा डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, पार्षद, शंकराचार्य परिषद उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त मुख्य शिक्षा अधिकारी, उत्तराखंड ने की। प्रथम दिवस का प्रभावी संचालन मनीष कुमार, मनीषा आवले चौगांवकर एवं जयप्रकाश उपाध्याय ने किया।
चार प्रमुख सत्रों में विभाजित प्रथम दिवस में उद्घाटन के उपरांत देवी पंथी के नेतृत्व में नेपाली चारु विधा से संबंधित विशेष प्रस्तुति हुई। इसके बाद ‘मां गंगा एवं सनातन संस्कृति’ विषय पर सारगर्भित विमर्श हुआ। वक्ताओं ने गंगा को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की जीवनधारा बताते हुए उसके संरक्षण को सामूहिक दायित्व बताया।
इसके पश्चात शोध-पत्र वाचन सत्र में शोधार्थियों एवं विद्वानों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोधपरक विचार और निष्कर्ष प्रस्तुत किए। प्रथम दिवस का समापन भव्य कवि सम्मेलन से हुआ, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रभाव, संस्कृति, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया।
द्वितीय दिवस-छह सत्रों में साहित्य और संस्कृति का गहन मंथन – महोत्सव के दूसरे दिन भी साहित्यिक एवं बौद्धिक गतिविधियों की श्रृंखला पूरे उत्साह और गरिमा के साथ जारी रही। द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि शाम्शवी पीठाधीश्वर, राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकराचार्य परिषद एवं संस्थापक काली सेना स्वामी आनन्दस्वरूप महाराज रहे।अति विशिष्ट अतिथि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, पार्षद, शंकराचार्य परिषद तथा आचार्य धर्मेन्द्र तिवारी, पूर्व कुलपति आरा विश्वविद्यालय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रमुख आचार्यकुल की गरिमामय उपस्थिति रही।
विशिष्ट अतिथियों में हर्ष प्रकाश काला, शिक्षाविद; रजनीश सिंह, एचओडी शिक्षा विभाग एवं एमओयू प्रभारी, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट तथा उद्योग जगत से जुड़े अशोक शुक्ला उपस्थित रहे। द्वितीय दिवस का संचालन मनीष श्रीवास्तव, मनीषा आवले चौगांवकर, जयप्रकाश उपाध्याय, डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’, कुंवर प्रवल प्रताप सिंह ‘प्रवल’ एवं रमेश द्विवेदी ने किया।
छह सत्रों में आयोजित दूसरे दिन के कार्यक्रमों में बौद्धिक विमर्श, सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन विशेष आकर्षण रहे। बौद्धिक सत्रों में भारतीय संस्कृति, साहित्य, सामाजिक सरोकार और समकालीन चुनौतियों सहित अनेक विषयों पर विद्वानों ने विचार रखे।
साहित्य और समाज के साधकों का हुआ सम्मान – महोत्सव के दौरान साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, समाजसेवा एवं विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने आयोजन को भावनात्मक एवं प्रेरणादायी ऊंचाई प्रदान की। सम्मानित व्यक्तित्वों ने इसे अपनी साहित्यिक एवं सामाजिक साधना के प्रति समाज की स्वीकृति और प्रोत्साहन बताया।
इसके पश्चात हुए कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न अंचलों से आए कवि-कवयित्रियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। काव्य की विविध धाराओं में राष्ट्र, समाज, प्रकृति, संस्कृति, प्रेम और मानवीय संवेदना के अनेक रंग मुखरित हुए।
आयोजन समिति के सामूहिक समर्पण से मिली सफलता – इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे आयोजन समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का सामूहिक समर्पण रहा। केशव पाण्डेय, राष्ट्रीय संयोजक; आचार्य धीरज द्विवेदी याज्ञिक, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष; विनय पाण्डेय एवं पवन कुमार सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष; मंजुल चतुर्वेदी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष; शालिनी रस्तोगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ; हिमांशु प्रजापति, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ; पूनम धस्माना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ; डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय, राष्ट्रीय समन्वयक एवं कार्यक्रम प्रभारी तथा इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सहित अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘दिव्य गंगा मिशन का भागीरथी प्रयास सराहनीय’ – महोत्सव के सफल समापन पर उपस्थित साहित्यकारों, विद्वानों, अतिथियों एवं संस्कृति प्रेमियों ने दिव्य गंगा सेवा मिशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को निरंतर सशक्त किए जाने की आवश्यकता है, तब ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना की लौ को प्रज्वलित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सकता है। इस दृष्टि से दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ केवल साहित्य का उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म, पर्यावरण और सामाजिक चेतना के समन्वय का सार्थक अभियान है।
दो दिवसीय आयोजन की सफलता में आयोजकों, आयोजन समिति के पदाधिकारियों, अतिथियों, साहित्यकारों, कवि-कवयित्रियों, शोधार्थियों, स्वयंसेवकों एवं आगंतुकों की सामूहिक सहभागिता रही। आयोजन के सफल समापन ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संचार किया।
गंगा की निर्मल धारा की तरह साहित्य की चेतना भी समाज में निरंतर प्रवाहित होती रहे—इसी संकल्प के साथ हरिद्वार की पावन धरती पर संपन्न यह साहित्यिक-सांस्कृतिक कुंभ अपनी स्मृतियों की अमिट छाप छोड़ गया। यह आयोजन महज दो दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि गंगा, साहित्य, सनातन संस्कृति और सामाजिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने वाला एक भागीरथी प्रयास रहा, जिसकी अनुगूंज लंबे समय तक साहित्यप्रेमियों और संस्कृति-साधकों के मन-मस्तिष्क में बनी रहेगी।
