अलविदा हमको न ऐसे कीजिए,
बस जरा सा मुस्कुरा ही दीजिए,
गम बहुत हैं इस जहां में दोस्तों,
दामन खुशियों का न थामा कीजिये,
डस न पाए तिमिर सच्चाई यहाँ,
सूरज को हाथों से थामा कीजिये,
हिस्से में जो जहर आये आपके,
हँसकर बस शिवरूप धरके पीजिए,
अलविदा कहने लगा है गुलिस्तां,
कलियों की खुशबू न बेचा कीजिये,
गर नही करते भलाई न सही,
पर बुराई से भी तौबा कीजिये,
– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश
