गजल – नीलांजना गुप्ता  

अलविदा हमको न ऐसे कीजिए,       

बस जरा सा मुस्कुरा ही दीजिए,

 

गम बहुत हैं इस जहां में दोस्तों,

दामन खुशियों का न थामा कीजिये,

 

डस न पाए तिमिर सच्चाई यहाँ,

सूरज को हाथों से थामा कीजिये,

 

हिस्से में जो जहर आये आपके,

हँसकर बस शिवरूप धरके पीजिए,

 

अलविदा कहने लगा है गुलिस्तां,

कलियों की खुशबू न बेचा कीजिये,

 

गर नही करते भलाई न सही,

पर बुराई से भी तौबा कीजिये,

– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

 

 

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