सुरक्षकर्मियों की विडंबना – प्रवीण त्रिपाठी

शस्त्र बल, सब को सुहाते किसलिये। मान के सब गान गाते किसलिये।1 ढेर सारे, क्षेत्र जब व्यवसाय के। मौत से पंजा लड़ाते किसलिये।2 हर विपद में, सैनिकों को याद कर।…

उपन्यास सम्राट प्रेमचंद – श्री ठाकुर

कुछ नाम समय की धूल में नहीं खोते, वे युगों की चेतना बनकर जीवित रहते हैं। प्रेमचंद ऐसा ही एक नाम हैं— जिनकी लेखनी ने शब्द नहीं, समाज की आत्मा…

आया  सावन – डॉ जसप्रीत कौर फ़लक

फिर आ गया है सावन- आसमान से मोती झर रहे हैं, क्या तुमने उन्हें अपनी हथेलियों में सहेजा है?   घर की खिड़कियों के परदे हटाकर मन के झरोखे खोले…

सुंदर दिखने की होड़ में नौजवान पीढ़ी में बढ़ती प्लास्टिक सर्जरी की ललक – सुभाष आनंद 

vivratidarpan.com –  देश के महानगरों में नौजवान पीढ़ी अपने चेहरे को नया लुक देने के लिए धड़ल्ले से प्लास्टिक सर्जरी का सहारा ले रही है। मुंबई, दिल्ली, बंगलुरू, जयपुर, चेन्नई…