दोस्ती का नाम सुनते ही, चेहरे पर आ जाए मुस्कान,
ना कोई स्वार्थ, ना कोई भेद, बस दिल से दिल का अरमान।
सुख में साथ हंसाए जो, दुख में कंधा बन जाए,
एक चाय में घंटों की बातें, पल में गम भुला जाए।
झगड़ा भी हो तो प्यार से, फिर से गले लग जाए,
“भाई” कहकर बुलाए जो, वही दोस्त कहलाए।
बैंड पहनाते हैं आज, पर बंधन तो दिलों का है,
मित्रता वो रिश्ता है, जो खून से भी ऊपर का है।
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा जिला पटना बिहार
