अधूरी ख्वाहिशें जिन्दगी की लुभाती हैं। मृगतृष्णा के रेगिस्तान में दौड़ाती हैं ।। अपनी परछाई यहाँ कौन पकड़ पाया है। हैं दिवास्वप्न ये इंसान को घुमाती हैं।। सबने…
रंगीला भंवरा पंख पसारे, फूलों संग मुस्काता है, रंग-बिरंगी दुनिया में वह, मधुर राग सुनाता है। कभी गुलाब की गोद में झूले, कभी कमल से बतियाए, मधु की मीठी बूंदों…
नीरव मन में उद्वेलित कुछ वह लम्हें, खुलने को आतुर अधखुली सी गिरहें, कुसुमित स्मित मृदु प्रणय के वह सारे पल दृग पुलिनों में तैरती वो सुहानी सुबहे। सिमटी…