आशा की किरण – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

अँधियारे के आँगन में, एक रेखा उजियारी, चुपके से आ बैठी, बनकर नई सवारी। टूटे हुए सपनों की, धूल अभी बाकी थी, उसमें ही चमक उठी, जैसे कोई ज्योति पावन…

सफर – राजेश कुमार झा

संदर्भ भी छूट जाएगा, शहर भी छूट जाएगा। जहां हम पैदा हुए थे,वो दर और घर भी छूट जाएगा।। छूट जाएगा वो हर रिश्ता , अपनो और बैगानो से। जिस…

बदल गया इंसान (लघुकथा) – डा. सहदेव बालियान

vivratidarpan.com – ज्येष्ठ महीने की चिलकती धूप वाली तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई थी.सुबह शाम क्यारी के पेड़-पौधों की सिंचाई करने से मिट्टी में नमी और ठंडक बनी रहने…

बदल मत जाना – रुचि मित्तल

बदलते मौसम से बदल मत जाना यह जो हवा का रुख है यह तुम्हारी दिशा तय करने नहीं आया। धूप का तेज होना तुम्हारी सहनशक्ति की परीक्षा है। छाँव का…

मुखौटे – सुनील गुप्ता

( 1 )” मु “, मुख पर लगाए घूम रहे मुखौटे, पहचानें कैसे, यहाँ आदमी सच्चे !!   ( 2 )” खौ “, खौफ़ खाए लगें डरावने ये मुखौटे, इनसे…

शिव विवाह – श्याम कुंवर भारती

चंद्रमा शिखर शिव जटा बीच गंग है बड़ा शोभत। गले भुजंग भभूत सब अंग कर डमरू है बाजत ।   बिगड़ी बनाए योगी कहलाए शिव बड़े है भोले भाले हे…

टूट रहे परिवार — डॉ. प्रियंका सौरभ

अब तो आये रोज़ ही, टूट रहे परिवार, फूट-कलह ने खींच दी, आँगन में दीवार॥   कल तक थी जिस आँगना, गूँजी हँसी-फुहार, अब सन्नाटों का वहाँ, फैला है अंधियार।…

हर आँगन दीवार- डॉo सत्यवान सौरभ

घर-घर में मनभेद है, बचा नहीं अब प्यार। फूट-कलह ने खींच दी, हर आँगन दीवार॥   स्नेह और आशीष में, बैठ गई है रार,65 अरमानों के बाग में, भरा जलन…

गुज़ारिश है – डॉ अणिमा श्रीवास्तव

बार बार हमें तोड़ कर फिर जोड़ने की बात… कितना लेंगे इम्तेहान ? और क्या देंगे सौगात…? यह क्या हो रहा है…? आजकल हमारे साथ…। यह कैसी नवाज़िश है? या…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आपको देख कर सिहर जाते, इतनी हो हूर हम ठहर जाते।   यार मुद्दत के बाद तुम आये, तेरे बिन यार हम किधर जाते।   यार उल्फत हुई है अब…