चाय  – सुनील गुप्ता 

( 1 ) चाय ख़ुशबू तन-मन जगा दे.., करे प्रसन्न  !! ( 2 ) चुस्की चाय की तरोताज़ा कर दे.., लगाए मन  !! ( 3 ) चाय गरम पीते  ही…

बर्तनों की लड़ाई – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

रसोई घर में रात हुई तो बर्तनों में बहस छिड़ी, थाली बोली अकड़ दिखाकर— “सबसे ऊँची मेरी कुर्सी!” कड़ाही बोली— “चुप भी रहो तुम, तेल बिना क्या काम तुम्हारा? पूड़ी,…

श्री गणेशाय नमः – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

वक्रतुंड श्री गणेश तात आपके महेश, पार्वती के पुत्र देव आपको प्रणाम है।   मस्तक किरीट सोहे छवि सदा मन मोहे, सौम्य रूप मनोहारी विग्रह ललाम है।   सर्वत्र मंगल…

कलयुग की कहानी – डॉ अनमोल कुमार

यह कलयुग है भाई, यहाँ रिश्ते भी बिकते हैं, मतलब के यारों से, अब घर-आँगन टिकते हैं। बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया, धर्म की बात करे जो, उसे…

भव्य आभासी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न – शिखा गोस्वामी निहारिका

vivratidarpan.com –  कहानिका हिंदी पत्रिका के छत्तीसगढ़ अध्याय द्वारा गूगल मिट पर नावेद रजा दुर्गावी,उप संपादक छत्तीसगढ़ अध्याय के जन्म दिन के अवसर पर एक अखिल भारतीय आभासी कवि सम्मेलन…

गैया हिन्दू, बकरा इस्लाम – डॉ. प्रियंका सौरभ

गैया हिन्दू हो गई, औ’ बकरा इस्लाम, पशुओं के भी हो गए, जाति-धर्म से नाम॥   इंसानों की सोच ने, बाँटे सबके काम, मूक जीव भी ढो रहे, नफ़रत के…

पटोरी में मातृ दिवस पर काव्य गोष्ठी आयोजित, भूतपूर्व शिक्षक केदारनाथ बर्णमाल को दी गई श्रद्धांजलि

vivratidarpan.com समस्तीपुर/ पटोरी (संवाददाता- प्रकाश कुमार राय)- नगर परिषद शाहपुर पटोरी के वार्ड – 01 स्थित सिरदिलपुर उसराहा वंदना परिसर में गत रविवार को सांयकाल बेला में विश्व मातृदिवस के…

अंधे खेवनहार – डॉo सत्यवान सौरभ

जर्जर कश्ती हो गई, अंधे खेवनहार, खतरे में ‘सौरभ’ दिखे, जाना सागर पार॥   लहरों का प्रहार है, उठता बारंबार, डगमग करती नाव में, टूटे हर आधार। दिशा सभी है…

राष्ट्रीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन : वाईबीएन विश्वविद्यालय में अदबी फिज़ा के बीच भव्य आयोजन संपन्न – डॉ अनमोल कुमार

vivratidarpan.com  रांची। वाईबीएन विश्वविद्यालय, नामकुम, रांची के हिंदी विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आज साहित्यिक गरिमा, सांस्कृतिक ऊष्मा एवं बौद्धिक ऊर्जा…

प्रभाती वंदन – डॉ गीता पांडेय अपराजिता

आकर्षित करता सदा,मांँ लक्ष्मी का रूप। जिस पर करती है कृपा, महिमा दिव्य अनूप। खुशियांँ मिले अपार है,गेह बने हैं स्वर्ग, विचलित वह होता नहीं, छांँव रहे या धूप।। कृपा…