जिंदगी की तपन – जितेंद्र कुमार

रेत पर नाम वें मेरा लिखते रहें, हर दफा सागर उसको मिटाते रहेंl मैंने उनसे कहाँ पत्थरों पर लिखो, पत्थरों पर लिखें लब्ज़ मिटते नहीं   उसके हर शब्द मीठे…

मंच की भीड़ में खोता साहित्य – रीता गुलाटी

vivratidarpan.com –  क्या साहित्य की आवाज़ सचमुच पाठक तक पहुँच रही है, या वह मंच की भीड़ में कहीं खोती जा रही है? कहा जाता है—“साहित्य समाज का दर्पण है।”…

मंथरा (काव्य-संग्रह) – सुधीर श्रीवास्तव

​1. मुखपृष्ठ: – पुस्तक का आवरण अत्यंत भव्य, कलात्मक एवं प्रासंगिक है। इस पर राजमहल के अंतःपुर की पृष्ठभूमि में चित्रित दृश्य में रानी कैकेयी गुलाबी वस्त्राभूषणों में गरिमामयी भाव…

मन का रावण मारिए- सुनील गुप्ता

( 1 ) बनें राम मारके मन रावण.., हो सार्थक तभी ये जीवन !! ( 2 ) करें अंत छिपे अंतस विकार.., होए प्रकट तभी राम भीतर !! ( 3…

जलते पुतले, बढ़ते रावण – प्रियंका सौरभ

जलते पुतले देखकर, खुश होता संसार। मन के रावण पल रहे, कौन करे संहार॥ पुतला जलकर राख है, मन में भरा विकार। कैसे होगा अंत फिर, झूठ-कपट- अहँकार॥ रावण के…

माता-पिता को समर्पित विमला ज्ञान साहित्य मंच पर नवरात्रि विशेष काव्य गोष्ठी

vivratidarpan.com – माता-पिता/ सास-ससुर की स्मृतियों को जीवंत रखने के उद्देश्य से अंजू श्रीवास्तव/ सुधीर श्रीवास्तव द्वारा स्थापित ‘विमला ज्ञान साहित्य मंच पर नवरात्रि विशेष आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन…

सेवानिवृति के उपरांत (लघुकथा) – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – सेवानिवृत्त होने के उपरांत महाविद्यालय पहुँचा, तो कुछ आत्मीय साथियों ने गर्म जोशी से स्वागत किया। कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने उपेक्षित नजरों से देखकर मुझसे दूरी बना…

माँ कालरात्रि – सुनील गुप्ता

( 1 ) माँ कालरात्रि गोल ब्रह्मांड जैसी.., हैं शुभंकरी !! ( 2 ) बिखरे केश गले विद्युत माला.., श्याम वर्ण की !! ( 3 ) सातवां रुप माता देवी…

हे मां ब्रह्मचारिणी – सविता सिंह

चहुं ओर बिखरती पावन हरसिंगार की महक, हे माँ! जगत में गूंज उठी तेरे आगमन की दस्तक। नवरात्रि के पावन पर्व का है यह दूसरा दिन, हे माँ ब्रह्मचारिणी! हम…

नवदुर्गा देवी – अशोक यादव

मँय तोर बेटा अँव दाई, तँय ह मोर महतारी ओ। तोला सुमरत आवत हँव, मँय ह तोर दुवारी ओ।। थारी म धरे हँव तोर बर, नरियर, फूल अउ चुनरी। महमहई…