चलते-चलते – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

पुष्प खिले हैं हर कहीं, पवन बहे अति मंद। भँवरे आतुर हैं सभी, पीने को मकरंद।। छटा बिखेरें तितलियाँ, रंग-बिरंगे फूल। खग छेड़ें  स्वर लहरियाँ, पा मौसम  अनुकूल।। <> आदमी…

मेरा मन उड़ता परिंदा – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मेरा मन उड़ता परिंदा, नभ से बातें करता, बिन पंखों के ही जाने, कितनी दूर उतरता। कभी बादलों की बाहों में, सपनों को सजाता, कभी धूप की सीढ़ी चढ़कर, उजियारा…

हरियाणवी लघुकथा का नया पड़ाव: ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’–डॉ. विजय गर्ग (पुस्तक समीक्षा)

vivratidarpan.com  ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ पहली बार देश-विदेश के 33 हरियाणवी लघुकथाकारों को एक मंच पर लाता है। 99 लघुकथाओं का यह अनूठा संकलन हरियाणा की माटी, लोकसंस्कृति और मानवीय…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये, जान हाजिर हमेशा तुम्हारे लिए।   साज छेडो पिया तुम हमारे लिए, इक तराना भी लिख दे तुम्हारे लिए।   आज सज कर चली…

याज्ञिक पवित्रता – सुनील गुप्ता

  यज्ञादि कर्म नित्य करते चलें, शुद्धता संग  !!1!!   शास्त्रविहित दान आहुति देते, करें सत्कर्म !!2!!   सम्यक ज्ञान दर्शन चारित्रय, आचरण हो  !!3!!   शुद्ध हृदय पवित्रता रखते,…

मुकरे होंगे लोग – सुनील गुप्ता

( 1 ) मुकरे होंगे लोग जरूर, तभी, कागज की पड़ी जरूरत !!   ( 2 ) नाशुकरे होंगे, वो मगरूर तभी, कर बैठे ऐसी हिमाक़त  !!   ( 3…

मिला जो मन का मीत – डॉ. बसंत श्रीवास वसंत

सूना -सूना था ह्रदय मेरा, सूना- सूना था अंतर्मन, जैसे थका मुसाफिर ठहरा हो, सूना हो घर आँगन। ना शब्द थे, ना अर्थ था, बस सांसों की थी संगीत, किस्मत…

चुनकर तुझको ही फली – सविता सिंह

चलो ना कुछ बुन लूँ , और कुछ चुन ही लूँ , कर लूँ कुछ एकत्र, बो दूँ खाद मिट्टी में अब उसको यत्र तत्र। अंकुरित होंगे जब रिश्ते, सीचूँगी…

भाड़े की भीड़ में यू ट्यूबरों की दुकान (व्यंग्य) – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – भारतीय लोकतंत्र में अफ़वाहों के आधार पर नित्य ही कहीं न कहीं भीड़ जुटती है, तदुपरांत वह किसी सार्वजनिक स्थल पर धरना प्रदर्शन करने लगती है। उसके हाथों…

आज – रुचि मित्तल

आज… घर की दीवारों ने मौन होकर माँ की साँसों को सुना है चूल्हे की आँच आज कम जली पर दुआओं की गर्मी हर कोने में फैली रही मुट्ठी भर…