ये बारिश का मौसम – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 पावस ऋतु जब भी आती है, बादल करते शोर रे। गर्जन तर्जन रिमझिम रिमझिम, हो वर्षा घनघोर रे।   धरती ओढ़े धानी चूनर, चहुँदिशि हरियाली छायी। शुष्क पड़ी महिती पर…

बच्ची की आखिरी सांस – -किरण मिश्रा

सबसे बड़ा सवाल अभी भी क्या उसको इंसाफ मिल पाएगा? या अंधों के बस्ते में फिर से इंसाफ दबा दिया जाएगा उस बच्ची की चीखें सोचकर मुंह तले कलेजा आया…

ग़ज़ल – डॉ0 अशोक गुलशन

कभी बैठकर कभी लेटकर चलकर रोये बाबू जी, घर की छत पर बैठ अकेले जमकर रोये बाबू जी।   अपनों का व्यवहार बुढ़ापे में ग़ैरों सा लगता है, इसी बात…

प्रयागराज का महाकुम्भ 2025 – आस्था का महामेला’ – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com ‘प्रयागराज का महाकुम्भ 2025 – आस्था का महामेला’ महाकुम्भ के बहुआयामी स्वरूप के काव्यात्मक/ चित्रात्मक अभिव्यक्ति को सैद्धांतिक/वैचारिक और आध्यात्मिकता का अनुपम उदाहरण है। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय…

समाजवाद का डुबता सूरज –  डॉ अनमोल कुमार

समाजवाद के झंडे पर अब धूल जमी है, नारे कहीं गलियों में खो गए। “सबका हक, सबकी रोटी” कहने वाले, बाजार की भीड़ में खो गए। कारखाने बंद, खेत उदास,…

घर लौटना – रेखा मित्तल

घर से निकले हुए लोग कभी घर वापस नहीं लौटते सपनों की उड़ान इतनी बड़ी हो जाती है घर लौटने का वक्त ही नहीं मिलता कभी लौटते हैं अपने आशियाने…

जीवन बंजर रेत – डॉ. प्रियंका सौरभ

जब दौलत की लालसा, बाँटे मन के खेत। ठूँठा-ठूँठा जग लगे, जीवन बंजर रेत।।   रिश्तों वाले गाँव में, घूम रहे अब प्रेत, जीते-जी इंसान सब, होते जाते श्वेत। चेहरों…

ग़ज़ल – नीलांजना गुप्ता   

नगर बसते जा रहे हैं दिल उजड़ते जा रहे हैं, दुनियाँ रोशन हो रही उर दीप बुझते जा रहे हैं,   क्या गिले शिकवे करें किसने हमको आकर लूटा, दोस्तों…

बॉलीवुड के स्वयंभू मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के दोहरे मापदंड – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – आज आपको अभिनेता आमिर खान का टीवी शो सत्यमेव जयते याद दिलाते हैं जिसमें वह हिन्दू मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए आलोचना कर अपना ज्ञान बांटते थे…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

चले आओ,स़नम मेरे, मुहब्बत ही दुआ भी है, तुम्हें पूजा सदा मैने मुहब्बत वो ख़ुदा भी है।   हुआ सूना ये मन कौना तुम्हे हरदम पुकारेगे, मिलोगे तुम हमे जब…