पुतला -प्रदीप सहारे

राह चलते देखा, ढाबे के किनारे। यंत्र से बना पुतला। बार-बार नमस्ते की, सजग मुद्रा में। सोचा, कितना सटीक है, इंसान का पुतला। इंसानी समाज में। इंसान जो बन बैठा,…

जीतिया पर माँ की भावना – डॉ अनमोल कुमार

नहा खा कर व्रत धरा, निर्जला है आज, जीतिया का नेम है, पुत्र की है लाज। न अन्न का दाना लगे, न पानी की बूँद, बस मेरे लाल की लगे,…

शुभ गणेशोत्सव – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

भाँति भाँति के गणपती, भिन्न भिन्न पंडाल। कर कमलों में हैं कमल, शोभा बनी विशाल। भक्ति भाव से पूजकर, मनते उत्सव आज। लंबोदर आशीष दें, सकल बनाएँ काज।।   हे…

मथुरा में प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 26 से, जुटेंगे 175 से अधिक साहित्यकार

vivratidarpan.com ​मथुरा। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा (संबद्ध: लोक संचेतना फाउंडेशन) के तत्वावधान में मथुरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन का प्रथम सत्र…

विडंबनाओं का आइना है ‘मेरे राम सबके राम’ – डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’

vivratidarpan.com – ‘मेरे राम सबके राम’ पुस्तक श्री राम के बहुआयामी व्यक्तित्व उनके आदर्शों और सार्वभौमिक संदेश को सरल , सुबोध एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है । सुधीर…

अंतर्मन की पुकार – सविता सिंह

क्यों द्रवित हुआ है अंतर्मन, क्यों व्यथित हमारा हुआ हृदय। क्या नेह किये थे असीमित, क्यों किया किसी ने ये अनय? न गरल मिले किसी मीरा को, न नयनों से…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

सुना सच जो दिल का जता कर चले। बुलाती रही,शब (रात) बिता कर चले।   गुजारी  हैं रातें भुला कर तुम्हें, सो तुम हमसे मुँह भी छुपाकर चले।   मैं डूबी…

काश! मैं बादल होता – विवेक रंजन श्रीवास्त

vivratidarpan.com – कविता के लिए हमेशा किसी असाधारण घटना की जरूरत नहीं होती। एक खाली मेज़, उड़ती पतंग, पहली बारिश की खुशबू, किसी मित्र की स्मृति या मन में उठती…

कुलपति चयन: विद्वता का सम्मान या जुगाड़ का पुरस्कार? – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com देश में उच्च शिक्षा के नाम पर अनेक राजकीय और निजी विश्वविद्यालय स्थापित हैं। मंडल स्तर पर स्थापित राजकीय विश्वविद्यालयों में कुलपति का मनोनयन सम्बंधित प्रदेशों के राज्यपाल द्वारा…

अश्रुधारा -आचार्य अवधेश झा

काठ काठ से आग जला दो बाबू जी ! सावन की बरसात भगा दो बाबू जी!! बचपन भर कोड़े कांधे पे रखते थे बाबू जी मेरे कभी न थकते थे…