पुष्प खिले हैं हर कहीं, पवन बहे अति मंद। भँवरे आतुर हैं सभी, पीने को मकरंद।। छटा बिखेरें तितलियाँ, रंग-बिरंगे फूल। खग छेड़ें स्वर लहरियाँ, पा मौसम अनुकूल।। <> आदमी…
मेरा मन उड़ता परिंदा, नभ से बातें करता, बिन पंखों के ही जाने, कितनी दूर उतरता। कभी बादलों की बाहों में, सपनों को सजाता, कभी धूप की सीढ़ी चढ़कर, उजियारा…
vivratidarpan.com ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ पहली बार देश-विदेश के 33 हरियाणवी लघुकथाकारों को एक मंच पर लाता है। 99 लघुकथाओं का यह अनूठा संकलन हरियाणा की माटी, लोकसंस्कृति और मानवीय…
यज्ञादि कर्म नित्य करते चलें, शुद्धता संग !!1!! शास्त्रविहित दान आहुति देते, करें सत्कर्म !!2!! सम्यक ज्ञान दर्शन चारित्रय, आचरण हो !!3!! शुद्ध हृदय पवित्रता रखते,…
vivratidarpan.com – भारतीय लोकतंत्र में अफ़वाहों के आधार पर नित्य ही कहीं न कहीं भीड़ जुटती है, तदुपरांत वह किसी सार्वजनिक स्थल पर धरना प्रदर्शन करने लगती है। उसके हाथों…