ग़ज़ल – रीता गुलाटी

मेरे दिल मे नही कुछ भी छुपा है, लगे है प्यार तेरा दिलरूबा है।   किधर हो यार मेरे ढूँढती हूँ, मेरा साया न कोई हमनंवा है।   नही भूला…

देखा असहमति को अपशब्दों का उत्सव बनते – प्रतिभा श्रीवास्तव

मैंने देखा है जंतर- मंतर पर असहमति को अपशब्दों का उत्सव बनते हुए। जंतर-मंतर की धरती पर जब राष्ट्र के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि के लिए गालियाँ नारे बन जाएँ, तब आहत…

साहित्य साधना से बनाई विशिष्ट पहचान, संघर्ष और संकल्प बनी प्रेरणा

vivratidarpan.com मुजफ्फरपुर (कुमार संदीप) । परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में अटूट विश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती…

गीत- जसवीर सिंह हलधर

लोक में परलोक का नक्शा उतारा जा रहा है । देवता भयभीत हैं क्यों स्वर्ग भू पर आ रहा है ।। अब हवाएं मौन होंगी नीड़ निगलेगी न आँधी ।…

देवशयनी एकादशी – सुनील गुप्ता

( 1 ) हरिशयनी कहें देवशयनी.., है एकादशी  !! ( 2 ) आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की बेला.., ग्यारस तिथि !! ( 3 ) पावन दिन श्री हरि विष्णु चले..,…

पिता का साया – प्रीति पारीक

तेरा साया मेरे सिर पर था तब तक बेखौफ शेर सा था मैं,,,, ना सुबह की चिंता ,ना शाम की फिक्र , असीम आनंद में भीगा था मैं , घर…

धर्मपत्नी सेवा (हास्य काव्य) – डॉ अनमोल कुमार

सुबह-सुबह उठकर पहले चाय बनानी पड़े, “कड़क बनाना” का ऑर्डर रोज़ आनी पड़े।   ब्रेकफास्ट में पराठा, लंच में दाल-चावल, डिनर में पूछो “क्या खाओगी?” तो बोले “कुछ हल्का-फुल्का”।  …

फल वाली (लघु प्रेम कथा) – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

गांव की छोटी-सी बाजार में रोज़ एक लड़की टोकरी में फल लेकर बैठती थी। सब उसे “फल वाली” कहकर बुलाते थे, लेकिन उसका नाम राधा था। उसकी मुस्कान में ऐसी…

वो सच्चा इंसान – डॉ. प्रियंका सौरभ

सौरभ सबको जो रखे, जोड़े एक समान। चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।   मीठे मुख के लोग तो, करते झूठा प्यार, मतलब होते ही बदलें, अपने सब व्यवहार। जो…

वयोवृद्ध साहित्यकार रमा राम पाण्डेय की स्वर्ण जयंती मनाई

vivratidarpan.com – नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में 26/07/2026 को सायंकाल 9.00 बजे से आभासी माध्यम से वयोवृद्ध साहित्यकार रमा राम पाण्डेय ‘निराला’ का स्वर्ण जयंती समारोह मनाया…