वक्रतुंड श्री गणेश तात आपके महेश,
पार्वती के पुत्र देव आपको प्रणाम है।
मस्तक किरीट सोहे छवि सदा मन मोहे,
सौम्य रूप मनोहारी विग्रह ललाम है।
सर्वत्र मंगल करें सकल विपत्ति हरें,
उसका कल्याण हो जो लेता तव नाम है।
सिंदूरी गजबदन मन से करें नमन,
भक्ति से जपते सभी नाम आठों याम है।
-कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
