मूर्तियाँ दूध पिएँ अगर, इसमें नहीं कमाल। भूखे बच्चे तृप्त हों, होगा तभी धमाल॥ पत्थर दूध उँडेलते, बजते जय-जयकार। सूखे होंठों से मगर, हार गया संसार॥ दरवाज़े भूखा खड़ा,…