काश! मैं बादल होता – विवेक रंजन श्रीवास्त

vivratidarpan.com – कविता के लिए हमेशा किसी असाधारण घटना की जरूरत नहीं होती। एक खाली मेज़, उड़ती पतंग, पहली बारिश की खुशबू, किसी मित्र की स्मृति या मन में उठती…

प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र का सौ बर्ष पर उपलब्धि और चुनौतियों पर कार्यक्रम आयोजित

vivratidarpan.com मुंगेर। विभागीय ने वक्तव्य सह संवाद आयोजित किया गया। जिसका विषय ” प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र के उन्नयन के सौ वर्ष उपलब्धियां और चुनौतियां “का आयोजन किया गया।…

अनन्त चतुर्दशी – डॉ अनमोल कुमार

भादो शुक्ल चतुर्दशी, अनन्त का त्योहार, विष्णु जी के रूप का, सबसे पावन द्वार। अनन्त धागा हाथ में, चौदह गांठ लगाय, जो बांधे सच्चे मन से, दुख सब मिट जाय।…

जमुई की घटना और सार्वजनिक संवेदना का संकट – रंजीत विद्यार्थी

vivratidarpan.com – महाभारत में द्रौपदी के अपमान का प्रसंग भारतीय स्मृति में केवल एक स्त्री के साथ हुए अन्याय की कथा नहीं है, वह उस सभा की चुप्पी का भी…

पत्रकार कौन है और प्रचारक कौन? – डॉ. प्रियंका सौरभ

vivratidarpan.com – आज के दौर में यह पहचानना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जा रहा है कि पत्रकार कौन है और प्रचारक कौन। समाचार माध्यमों की संख्या बढ़ी है,…

पाँच दिन के सप्ताह के लिए पांच दिन बैंक बंद – डॉ. शैलेश शुक्ला

vivratidarpan.com – देश के सरकारी बैंकों में 26 से 30 सितंबर तक लगातार पाँच दिन शाखा सेवाएँ प्रभावित रहने की स्थिति बन रही है। 26 सितंबर को चौथा शनिवार है,…

कुलपति चयन: विद्वता का सम्मान या जुगाड़ का पुरस्कार? – डॉ. सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com देश में उच्च शिक्षा के नाम पर अनेक राजकीय और निजी विश्वविद्यालय स्थापित हैं। मंडल स्तर पर स्थापित राजकीय विश्वविद्यालयों में कुलपति का मनोनयन सम्बंधित प्रदेशों के राज्यपाल द्वारा…

अश्रुधारा -आचार्य अवधेश झा

काठ काठ से आग जला दो बाबू जी ! सावन की बरसात भगा दो बाबू जी!! बचपन भर कोड़े कांधे पे रखते थे बाबू जी मेरे कभी न थकते थे…

थाना देवबंद पुलिस द्वारा 01 शातिर अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से 01 देशी तमंचा पोना 315 बोर बरामद

vivratidarpan.com देवबंद — वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर के निर्देशन में अवैध शस्त्र की बिक्री/तस्करी की रोकथाम हेतु जनपदीय पुलिस द्वारा लगातार चैकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जिसके अनुपालन में पुलिस…

पूर्णिका (दुनियादारी) – श्याम कुंवर भारती

कौन कहता है जो गिरता है वो फिर संभलता नहीं है। ऐसा देखा  है गेंद गिरे जमीन पर और उछलता नहीं है।   आसमान में उड़ो मगर पाव जमीन पर…