करेगा बात वफा की जहन मे तू आयेगा,
हँसेगा देख मुझे और मुस्कुराएगा।।
किया है प्यार भी तुमसे,वफा निभाएगा,
बनोगे मेरे सजन दिल हमे जताएगा।
रखो नही उम्मीदे कब,कहाँ हुई पूरी,
जमाना तुमको ही बस आईना दिखाएगा।
रकीब संग करूँ प्यार से भरी बातें,
सकूं बड़ा मिलता,यार जब हँसाएगा।
कहाँ मिली है श़ज़र को भी नेकियाँ जग से,
वो दर्द भी सहे दुनिया से छुपाएगा।
कदम कदम पे मिले यार हमको धोखे भी.
नही मिला कोई सच्चा, जो राह दिखाएगा।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
