किताब का एक पन्ना
पूरी दुनिया घुमा लाता है,
बिना टिकट, बिना पासपोर्ट
दिल को आकाश दिखा जाता है।
क्यों मनाएँ पाठन दिवस?
19 जून को जन्मे थे पी.एन. पणिक्कर –
केरल के वो ग्रंथपाल,
जिन्होंने कहा था – “पढ़ो और बढ़ो”।
उनकी याद में ही ये दिन
राष्ट्रीय पाठन दिवस कहलाता है।
किताब क्या है?
किताब सिर्फ कागज नहीं,
वो माँ की लोरी है,
बाबा का अनुभव है,
दोस्त की सलाह है,
और वक्त का आईना है।
कलाम साहब की “अग्नि की उड़ान”
हौसला दे जाती है,
प्रेमचंद की “ईदगाह”
आँख नम कर जाती है,
गीता का एक श्लोक
जीवन का रास्ता दिखा जाता है।
मोबाइल vs किताब –
रील 30 सेकंड में खत्म,
दिमाग खाली का खाली।
किताब का एक अध्याय
सालों तक साथ निभाता है।
स्क्रीन की रोशनी आँख जलाती है,
किताब की स्याही नींद बुलाती है।
नोटिफिकेशन ध्यान तोड़ते हैं,
किताब का हर शब्द ध्यान जोड़ता है।
हमारा संकल्प –
1. दिन का 20 मिनट – बस एक कहानी, एक पन्ना कविता, एक पन्नबच्चों को कहानी* – सोने से पहले मोबाइल नहीं, परीकथा।
किताब गिफ्ट – जन्मदिन पर केक नहीं, किताब दो।
लाइब्रेरी चलो – गाँव-शहर की लाइब्रेरी में धूल न जमने दें।
डिजिटल उपवास – हफ्ते में एक दिन बिना स्क्रीन, सिर्फ पन्ने।
गरीब का बच्चा भी किताब से
राष्ट्रपति बन सकता है – कलाम मिसाल हैं।
किताब वो सीढ़ी है
जो झोपड़ी से महल तक ले जाती है।
तो उठाओ कोई किताब,
धूल झाड़ो, पन्ना पलटो –
क्योंकि
जो पढ़ता है, वो बढ़ता है,
जो बढ़ता है, वही देश गढ़ता है।
पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया!
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना, बिहार
