डॉ. राजश्री वर्मा के रहस्य-रोमांचक उपन्यास ‘तीसवाँ द्वार’ का भव्य विमोचन राजेश वर्मा ने किया

vivratidarpan.com जमशेदपुर ( झारखंड) । समकालीन हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में चर्चित रहस्य-रोमांचक उपन्यास ‘तीसवाँ द्वार’ का भव्य विमोचन प्रख्यात पत्रकार एवं समाजसेवी राजेश कुमार वर्मा के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया। अपने संबोधन में राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि ‘तीसवाँ द्वार’ केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि रहस्य, इतिहास, रोमांच और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि डॉ. राजश्री वर्मा की लेखनी पाठकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखने की क्षमता रखती है तथा यह कृति हिंदी साहित्य में रहस्य-प्रधान उपन्यासों की परंपरा को नई दिशा प्रदान करेगी।

लेखिका डॉ. राजश्री वर्मा ने समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, साहित्य-प्रेमियों एवं अपने सभी पाठकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘तीसवाँ द्वार’ वर्षों के अध्ययन, शोध, कल्पनाशक्ति और लेखन-साधना का परिणाम है। उनका उद्देश्य केवल एक रोचक कहानी प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि पाठकों को ऐसे रहस्यलोक में ले जाना है, जहाँ प्रत्येक अध्याय नए प्रश्न खड़े करता है और प्रत्येक उत्तर एक नए रहस्य का द्वार खोल देता है। तीसवाँ द्वार’ की कुछ रोमांचक झलकियाँ- आखिर ‘तीसवाँ द्वार’ क्या है, जिसके अस्तित्व को सदियों से रहस्य बनाकर रखा गया?- कौन-सा ऐसा प्राचीन रहस्य है, जिसकी रक्षा पीढ़ियाँ करती रही हैं?- क्या एक भूली-बिसरी विरासत वर्तमान का भविष्य बदल सकती है- रहस्यमयी संकेत, गुप्त पांडुलिपियाँ, अनसुलझे इतिहास और अप्रत्याशित मोड़—आखिर इन सबके पीछे छिपा सत्य क्या है? ‘तीसवाँ द्वार’ पाठकों को ऐसे रोमांचकारी सफर पर ले जाता है, जहाँ हर अध्याय उत्सुकता को और गहरा करता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रहस्य की परतें खुलती जाती हैं और अंत तक पहुँचते-पहुँचते पाठक स्वयं को ऐसे सत्य के सामने पाते हैं, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होती। रहस्य, रोमांच, इतिहास, भावनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं से भरपूर यह उपन्यास पाठकों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।

कार्यक्रम के अंत में लेखिका ने पाठकों के साथ संवाद किया, उनकी जिज्ञासाओं का उत्तर दिया तथा पुस्तक पर हस्ताक्षर कर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। यह आयोजन साहित्य, सृजनशीलता और हिंदी भाषा के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायी उत्सव बन गया।तीसवां द्वार के लिए बिहार प्रेस मेन्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अनमोल कुमार ने इस उपन्यास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

रिपोर्ट डॉ अनमोल कुमार

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