ग़ज़ल – रीता गुलाटी

गीत भी गाना है अश्क भी छुपाना है। पास तेरे अब आकर,राज़ सब बताना है।   दर्द हाय बढ़ता है,अब सहा नही जाता, चैन भी नही मिलता, दर्द सब सुनाना…