दर्द दिल का छुपा नही रहता।
प्यार दिल मे दबा नही रहता।
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जीस्त मे सर झुका नही रहता,
मेहरबा लब क़ज़ा नही रहता।
तेरी जानिब खिँची ये रूह मेरी,
साथ मेरे खुदा नही रहता।
चूम कर लब किधर चले जाना,
तेरे बिन अनछुआ नही रहता।
दर्द देता सदा वो अपनो को,
उसके दिल मे खु़दा नही रहता।
आज खुशियां मिली बहाने से,
दिल मेरा जला नही रहता।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
