बात दिल की कहे मुस्कुराते हुए,
राज दिल का कहे गुनगुनाते हुए।
होश उसने उड़ाये अदा से बड़े,
जाम मस्ती का अपने पिलाते हुए।
दर्द दिल का सभी हम भुलाये चले,
जी रहे इश्क मे दिल जलाते हुए।
प्यार का गीत मिलकर सुना यार तू,
खूबसूरत लगे हो तुम लुभाते हुए।
वक्त गुजरे तुम्हारा सदा साथ मे,
प्यार की रस्म मिलके निभाते हुए।
दर्द से वो घिरा है जमाने मे अब,
रो पड़ा आज वो ये बताते हुए।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
