क्षण भंगुर जीवन – डॉ अनमोल कुमार

जन्म लेकर इंसान इस धरती पर आता है,

पर कितनी लंबी होगी उसकी यात्रा, यह कोई नहीं जानता।

आज साँसों का कारवाँ चल रहा है,

कल कौन समय की गोद में समा जाए, कोई नहीं जानता।

फिर किस बात का अहंकार?

किस बात का घमंड?

क्यों मन में द्वेष और नफ़रत की दीवारें खड़ी करें,

जब एक दिन सब कुछ यहीं छोड़कर जाना है?

धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा और सत्ता,

ये सब समय के साथ मिट जाने वाले साए हैं।

लेकिन प्रेम से बोला गया एक शब्द,

किसी के आँसू पोंछने वाला एक हाथ,

और किसी के चेहरे पर लाई गई मुस्कान,

यही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

एक दिन ऐसा भी आता है,

जब इंसान केवल यादों में रह जाता है।

तब लोग उसके बारे में क्या कहेंगे?

यही कि वह अच्छा इंसान था,

जिसने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया,

बल्कि लोगों के जीवन में खुशियाँ बाँटी।

नफ़रत की आग जलाने से बेहतर है,

प्रेम के दीप जलाए जाएँ।

मतभेद हो सकते हैं, विचार अलग हो सकते हैं,

पर दिलों में इंसानियत बनी रहनी चाहिए।

किसी के दुःख में सहारा बनो,

किसी की खुशी में सहभागी बनो।

क्योंकि जीवन का असली अर्थ

सिर्फ अपने लिए जीना नहीं,

बल्कि दूसरों के जीवन में प्रकाश बनना है।

मृत्यु जीवन का अटल सत्य है,

लेकिन उससे पहले जीवन को सुंदर बनाना

हमारे हाथ में है।

इसलिए हँसो, प्रेम करो, क्षमा करो,

रिश्तों को संजोओ, लोगों को जोड़ो,

और हर दिन को कृतज्ञता के साथ जियो।

क्योंकि अंत में न धन साथ जाता है,

न पद, न प्रतिष्ठा और न अहंकार।

साथ जाती हैं केवल हमारी नेकियाँ,

और लोगों के दिलों में हमारे लिए सम्मान और दुआएँ।

आओ, इंसान बनकर जन्म लिया है,

तो इंसानियत के साथ जीवन जिएँ।

खुद भी खुश रहें,

और दूसरों के जीवन में भी खुशियों के दीप जलाएँ।

“जो जीवन दूसरों के लिए उपयोगी बन जाए,

वही जीवन वास्तव में सफल कहलाता है।”

– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा जिला पटना बिहार

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