31 जुलाई का दिन आया, कलम के मसीहा का जन्मदिन,
“उपन्यास सम्राट” प्रेमचंद को, कोटि-कोटि नमन।
गरीब किसान की व्यथा लिखी, “गोदान” में होरी का दर्द,
“पूस की रात” में ठिठुरन थी, “कफन” में समाज का मर्म।
उर्दू से हिंदी तक सफर, “नवाबराय” से “प्रेमचंद” बने,
आम आदमी की आवाज़ बने, साहित्य को नई राह दी।
शोषण, दहेज, जाति-पाति पर, कलम से वार किया,
सच की स्याही से हर पन्ना, रोशन संसार किया।
आज जयंती पर संकल्प लें, उनके विचारों को अपनाएं,
साहित्य और संवेदना से, भारत को फिर से सजाएं।
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा जिला पटना बिहार
