vivratidarpan.com – बरसात का मौसम अपने साथ नमी और सीलन भी लाता है, और इसी नमी में सबसे ज्यादा पनपती हैं बरसाती फफूंद। ये दिखने में छोटी लगती हैं, पर पूरे घर को अपनी चपेट में ले लेती हैं।
अक्सर हम देखते हैं कि बिस्तर, कंबल और कपड़ों से एक अजीब सी बू आने लगती है, जो सर्दी-जुकाम और एलर्जी का कारण बनती है। दीवारों के कोनों में जाले लग जाना, सीलन भरी दीवारों का पपड़ी छोड़ना, सफेद-काले धब्बों का दिखना – ये सब फफूंद के ही लक्षण हैं। बरसात में कपड़े ठीक से नहीं सूखते, धूप के अभाव में कीटाणु खत्म नहीं होते और कपड़ों से बर्दाश्त से बाहर की बदबू आने लगती है।
यह फफूंद बहुत संक्रामक होती है। कई बार यह लकड़ी और स्लैब्स पर भी फैल जाती है। इससे सबसे ज्यादा खतरा फेफड़ों और श्वसन तंत्र को होता है। त्वचा पर खुजली, आंखों में जलन-लाली और फफूंद की बू से सिरदर्द तक की शिकायत हो सकती है।
बरसात के इन 3-4 महीनों में राहत पाने के लिए कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं:
1. दीवारों की देखभाल: दीवारों के जाले नियमित हटाएं। कोनों में फिनाइल की गोलियों की पोटली बांध कर टांग दें, इससे सीलन और बदबू कम होती है।
2. कपड़ों की सफाई: कपड़े धोते समय आखिरी पानी में थोड़ा डेटॉल डालकर निचोड़ें। बीच-बीच में जब भी धूप निकले, बिस्तर, कंबल और अलमारी के कपड़ों को जरूर धूप दिखाएं। कपड़ों में हल्का फैब्रिक परफ्यूम इस्तेमाल कर सकते हैं।
3. अलमारी और बिस्तर के लिए: पुराने बैंडेज या मलमल के कपड़े के टुकड़ों में 2-3 कपूर के टुकड़े रखकर छोटी पोटलियां बना लें। इन्हें अलमारी, पेटी, दीवान में रख दें। नेप्थलीन बॉल्स का भी उपयोग किया जा सकता है। 4-5 कपूर की टिकिया गद्दे के ऊपर, चादर के नीचे और तकिए के नीचे रखने से भी फफूंद और बदबू से बचाव होता है।
4. घर में ताजगी: घर में रूम फ्रेशनर या अच्छे परफ्यूम का प्रयोग करें। घर की सफाई में इस्तेमाल होने वाले पोछे और डस्टर को हर हफ्ते बदल दें या अच्छी तरह धोकर धूप में सुखा लें।
सबसे जरूरी बात, इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। खुद को स्वस्थ रखें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और बरसात के त्योहारों का आनंद लें। (विभूति फीचर्स)
