प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र का सौ बर्ष पर उपलब्धि और चुनौतियों पर कार्यक्रम आयोजित

vivratidarpan.com मुंगेर। विभागीय ने वक्तव्य सह संवाद आयोजित किया गया। जिसका विषय ” प्रज्ञा प्रवाह और सांस्कृतिक राष्ट्र के उन्नयन के सौ वर्ष उपलब्धियां और चुनौतियां “का आयोजन किया गया। इसके मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय सह संयोजक श्री चंद्रकांत शर्मा थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि कल्चर और नेशन शब्द संस्कृति और राष्ट्र के परिचायक नहीं है। जहाँ कल्चर और नेशन पाश्चात्य अवधारणा है वही संस्कृति और राष्ट्र पूरी तरह हमारी सांस्कृतिक अवधारणा है, और यह उससे अलग और ज्यादा व्यापक है। वसुधैव कुटुम्बकम् हमारी विचारधारा नहीं हमारी जीवन चर्या का हिस्सा है। ये हमारी जीवन दृष्टि का अंग हैं। जहाँ नागरिकता पाश्चात्य अवधारणा हैं वही राष्ट्रीयता भारतीय विचार है। राष्ट्रीयता ही वह विचार है जो पिछले 8-9 पीढ़ी के गिरमिटिया को भारत से जोड़े हुए। रामचरितमानस और छठ जैसे सांस्कृतिक मूल्य आज भी उनको पुण्यभूमि भारत से जोड़े हुए हैं।हमारी संस्कृति में विवाह एक समझौता नहीं बल्कि आत्माओं का संबंध हैं , ये हमारी भारतीय जीवन दृष्टि है। हमारे अंदर जो भारतीयता का भाव है वही हिंदुत्व है। हिंदू और भारतीयता एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि एक जीवन पद्धति है। यह जीवन पद्धति वो सब लोग मानते है जो हिमालय और हिन्द महासागर के बीच की भूमि पर रहते हैं। हमारी संस्कृति प्रकृति को ईश्वर स्वरूप मानती । हमारे अंदर जो सांस्कृतिक राष्ट्रव की जो भावना है वही हमारे देश की एकता की गारंटी है। इस संवाद में प्रज्ञा प्रवाह दक्षिण बिहार प्रांत के संयोजक श्री कृष्णकांत ओझा जी एवं संघ के मुंगेर विभाग के सर संघ संचालक अमरकांत केशरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस संवाद को अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ.) प्रभात कुमार ने की। कार्यक्रम के मंच का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के डीजे कॉलेज के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या कुमार चौधरी ने एवं नेहा सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के जिला संयोजक श्री संतोष कुमार , महिला आयाम दक्षिण बिहार प्रांत की प्रमुख स्वाति कुमारी, सहित मुंगेर का प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति रही। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृपाशंकर पांडे ने किया। रिपोर्ट – डॉ अनमोल कुमार

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