vivratidarpan.com – लोक संस्कृति और लोक परम्परा में उल्लास और मस्ती का पर्व होली हर वर्ष की भाँति नियत समय पर आ गया है। इसे आना ही था, फाल्गुन पूर्णिमा पर…
नशा शराब के बेअसर हो जाला। तोहार हुस्न जब नजर हो जाला। डगमगाला पांव नशा के असर से, नशा आंख दिल पर गदर हो जाला। झुके नजर त…
मैं तुम्हें चाहता हूँ, तुम पर ही मर मिटा हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। धड़कनें कह रही हैं, कुछ सुनो तो ज़रा। पास आओ ना…
( 1 ) वक्त बता ही देता, कि, कौन है कीमती हमारे लिए !! ( 2 ) फ़क़त यही ज़रूरी है, कि, पहचानलें अभी, समय रहते हुए !! …
प्रीत तुमको हुआ और निखर मैं गयी। थाम तुमने लिया और बिखर मैं गयी। हो चुकी हूँ रति मैं तो तेरे प्रेम में। मौन स्पर्श था सखे और सिहर मैं…
लेखनी ही है एक ऐसी विधा, जहाँ बाँच सकते उर की व्यथाI भावनाओं को शब्दों में पिरो कर, उकेर देते हैं उसे कागज परI खोल देते हैं सारी गाँठे, जो…
छलक आवेला आंखन आंसू बेवफा तोहार मुस्काइल बा कातिल। कुछउ भावे ना आंखी के आगे बेदर्दी तोहार शर्माइल बा कातिल। तू सतावा जेतना केवनो बात ना हम कइली गुहार…
प्रसन्न रहें औरों में मत फंसें, स्वयं में रहें !!1!! जीवन हो कैसा जब जहाँ जैसे हो, मस्ती में जीएं !!2!! सीखें अपनी अनुभूति से हम, स्वयं में…
गर्म चाय, एक मीठा सा अहसास, जीवन की ठंडक में एक गर्मी का वास। धुएं की खुशबू, कप में उठती भाप, मन को सुकाती, दिल को देती छाप। पत्तियों का…
शायद किसी पुरानी किताब के बीच दबा हुआ वो सुर्ख गुलाब है जिसकी पंखुड़ियाँ तो सूख गई हैं पर खुशबू अब भी पन्नों में सांस लेती है। ये वो बेनाम…