भव्य आभासी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न – शिखा गोस्वामी निहारिका

vivratidarpan.com –  कहानिका हिंदी पत्रिका के छत्तीसगढ़ अध्याय द्वारा गूगल मिट पर नावेद रजा दुर्गावी,उप संपादक छत्तीसगढ़ अध्याय के जन्म दिन के अवसर पर एक अखिल भारतीय आभासी कवि सम्मेलन…

गैया हिन्दू, बकरा इस्लाम – डॉ. प्रियंका सौरभ

गैया हिन्दू हो गई, औ’ बकरा इस्लाम, पशुओं के भी हो गए, जाति-धर्म से नाम॥   इंसानों की सोच ने, बाँटे सबके काम, मूक जीव भी ढो रहे, नफ़रत के…

पटोरी में मातृ दिवस पर काव्य गोष्ठी आयोजित, भूतपूर्व शिक्षक केदारनाथ बर्णमाल को दी गई श्रद्धांजलि

vivratidarpan.com समस्तीपुर/ पटोरी (संवाददाता- प्रकाश कुमार राय)- नगर परिषद शाहपुर पटोरी के वार्ड – 01 स्थित सिरदिलपुर उसराहा वंदना परिसर में गत रविवार को सांयकाल बेला में विश्व मातृदिवस के…

अंधे खेवनहार – डॉo सत्यवान सौरभ

जर्जर कश्ती हो गई, अंधे खेवनहार, खतरे में ‘सौरभ’ दिखे, जाना सागर पार॥   लहरों का प्रहार है, उठता बारंबार, डगमग करती नाव में, टूटे हर आधार। दिशा सभी है…

राष्ट्रीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन : वाईबीएन विश्वविद्यालय में अदबी फिज़ा के बीच भव्य आयोजन संपन्न – डॉ अनमोल कुमार

vivratidarpan.com  रांची। वाईबीएन विश्वविद्यालय, नामकुम, रांची के हिंदी विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आज साहित्यिक गरिमा, सांस्कृतिक ऊष्मा एवं बौद्धिक ऊर्जा…

प्रभाती वंदन – डॉ गीता पांडेय अपराजिता

आकर्षित करता सदा,मांँ लक्ष्मी का रूप। जिस पर करती है कृपा, महिमा दिव्य अनूप। खुशियांँ मिले अपार है,गेह बने हैं स्वर्ग, विचलित वह होता नहीं, छांँव रहे या धूप।। कृपा…

नाप रहे फुटपाथ – डॉ. सत्यवान सौरभ

स्याही, कलम, दवात से, सजने थे जो हाथ। कूड़ा-करकट बीनते, नाप रहे फुटपाथ।।   जिन आँखों में स्वप्न थे, पढ़ने के अरमान। धूल धुएँ में ढूँढते, जीवन का सामान।। कैसा…

कविता – श्याम कुंवर भारती

बूढ़ा न नादान अभी तो मैं जवान हूं। दूध घी बादाम अभी तो मैं जवान हूं।   उम्र ढले या न ढले दिल रहे कायम । मन से रहता बच्चों…

प्रेम और मानवीय संबंधों का ‘सारंग राग’ (पुस्तक समीक्षा) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com –  एकल संग्रहों की श्रृंखला में एक और संग्रह का प्रवेश हुआ है, और यह है होनहार युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी के ‘सारंग राग’ का।जो संवेदनाओं की स्वर लहरी…

क्या हूँ मैं ? – सविता सिंह.

कभी लगता है, मैं क्या हूँ, खुद से ही पूछूँ कौन हूँ, रिश्तों की डोरी से उलझी , खुद से रही अनजान हूँ। कई- रिश्ते, कई संबंध, हर से निकलते…