वह नन्हा सा राजकुंवर, जब खींचता है कुर्ता मेरा, कहता है— “दादा जी, बस सोए ही रहते हो, चलो ना, मेरे साथ खेलने।” मैं मुस्कुराता हूँ, अपनी थकी हड्डियों में…
पूर्व दिशाओं में रंग सुनहरा, छाई हल्की-सी झंकार , उठा धरा का कोना-कोना, आई भोर लिये उपहार। लाल किरण की चूनर ओढ़े, आया सूरज मुस्का-मुस्का, बिखर गई सोई गलियों…