गजल (भोजपुरी) – श्याम कुंवर भारती

छलक आवेला आंखन आंसू बेवफा तोहार मुस्काइल बा कातिल। कुछउ भावे ना आंखी के आगे बेदर्दी तोहार शर्माइल बा कातिल।   तू सतावा जेतना केवनो बात ना हम कइली गुहार…

प्रसन्न रहें – सुनील गुप्ता

प्रसन्न रहें औरों में मत फंसें, स्वयं में रहें  !!1!!   जीवन हो कैसा जब जहाँ जैसे हो, मस्ती में जीएं  !!2!!   सीखें अपनी अनुभूति से हम, स्वयं में…

कविता – वैशाली रस्तोगी

गर्म चाय, एक मीठा सा अहसास, जीवन की ठंडक में एक गर्मी का वास। धुएं की खुशबू, कप में उठती भाप, मन को सुकाती, दिल को देती छाप। पत्तियों का…

पुरानी किताब – रुचि मित्तल

शायद किसी पुरानी किताब के बीच दबा हुआ वो सुर्ख गुलाब है जिसकी पंखुड़ियाँ तो सूख गई हैं पर खुशबू अब भी पन्नों में सांस लेती है। ​ये वो बेनाम…

गीत – जसवीर सिंह हलधर

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी से याचना कर । हार का भय त्याग दे यह , आत्मजय की कामना कर ।।   भीड़ है कुछ सिर फिरों की,…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

मुफलिसो मे लोग जीते ले नमी कैसे कहूँ। आँख मे आँसू भरे हैं फिर हँसी कैसे कहूँ।   सजदे मैने अब कियें हैं,वो निशां थे आपके। दिल मे उठते इस…

जाड़ों का मौसम और सुहानी धूप – सुनील गुप्ता

( 1 ) है जाड़ों का मौसम निकली सुहानी धूप सुनहरी  ! चले समाए तन-मन में आनंद…, खिलीं मधुर स्मृतियाँ मनोहारी !! ( 2 ) हैं शबनम की बूंदे पड़ी…

रजत संगम – डॉ निधि दीपिका बोथरा जैन

पच्चीस वर्षों का ये सफ़र, विश्वास का सार बना। साथ निभाते हुए इस राह में, अपनों संग घर बना। हर मौसम में दो हाथों का, यह अटूट साथ बना। प्रेम,…

दि ग्राम टुडे ई-पत्रिका ‘डा. अभि दा एक बहुआयामी व्यक्तित्व’ विशेषांक विमोचित

vivratidarpan.com गोरखपुर :  देव निर्माल्य साहित्यिक संस्थान के साहित्यिक पटल पर संस्थान तथा दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 12 फरवरी को रात्रि 8:30 बजे दि…

हमरे गँउआ के पहचान – अनिरुद्ध कुमार

रुनझुन रुनझुन होत विहान। आसन-बासन मुसकी जान। लीपा पोती मनहर गान। कूटा, पीसी,जाँत,पिसान। चूल्हा चौकी भोग बिधान। हमरे गँउआ के पहचान।।   घरसे फरका दूर बथान। मालजाल गोती गोतान। ले…