गीत – जसवीर सिंह हलधर

काव्य रूपी नाव ले उस पार जाना चाहता हूँ । शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।। गद्द रूपी पंक्तियों को तोड़कर कविता बनायी । रेत में डूबी…

जाना है उस पार – अनिरुद्ध कुमार

छूट रहा सब रिश्ता नाता, अब क्या सोंचे यार। मन का पंछी चला अकेला, जाना है उस पार।। सोन चिरैया तोले मोले, बेचैनी में क्या क्या बोले, बार बार लेती…

कहानिका शिखा आभासी कवि सम्मेलन हुआ सम्पन्न

vivratidarpan.com – कहानिका हिंदी पत्रिका (महिला कल्याण समिति धोरी,बोकारो द्वारा संचालित) के छत्तीसगढ़ अध्याय द्वारा शिखा गोस्वामी निहारिका ,केंद्रिय सूचना प्रभारी और विभा तिवारी सह संपादक, कहानिका तथा छत्तीसगढ़ राज्य…

बदलता साल – सुनील गुप्ता

( 1 ) बदले साल हम न बदलें तो, हो बुरा हाल  !!   ( 2 ) घर में टंगे कैलेंडर की जैसे, हमारा हाल  !!   ( 3 )…

कितना लगता है प्यारा – अनिरुद्ध कुमार

पल-पल जीवन बीत रहा, सुख-दुख का संगीत रहा। भटक रहा मन कहाँ कहाँ, हार जीत मनमीत रहा।   लम्हा पथ रोक खेल करें, आनंदित अठखेल करें। मानव जीवन काट रहा,…

पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

दिल लेके दिल नहीं दिया तुमको हम बेईमान कहेंगे। कद्र नहीं नाजुक दिल नहीं तुमको हम कद्रदान कहेंगे।   अपनी मर्जी से आना जाना आंखों को प्यासा छोड़कर। तड़पता देख…

सोच को बदलो, त्यौहार नहीं – ज्योती वर्णवाल

हम गर्व से कहते फिरते हैं, बच्चा मेरा ‘कान्वेंट’ जाता है, ए.बी.सी.डी. जब वो बोले, तब मन बड़ा हर्षाता है। तब रीत नहीं आड़े आती, न ही संस्कृति घबराती है,…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

नगमे गाओ साल-ए-नौ के। खौफ़ मिटाओ साल-ए-नौ के।   जाएगा अब साल पुराना जश्न मनाओ साल-ए-नौ के।   लड्डू बाँटे प्यार से यारों दिल से खिलाओ साल-ए-नौ के   मंजिल…

मेरी नज़र में – डॉ क्षमा कौशिक

यह हिंदूं नव वर्ष नहीं है। पर मन में कम हर्ष नहीं है। हम तो उत्सव प्रेमी ठहरे। खुश होने में हर्ज नहीं है।।   नव संवत्सर जब आयेगा। नई…

फुटपाथ – प्रदीप सहारे

सडक किनारे बनते हैं फुटपाथ। रंग-बिरंगे, दिखते हैं लुभावने। मोह होता है उन पर चलने का, लेकिन फुर्सत किसे!! तो दिखाई देते हैं खाली। दौड़ती सड़क संग आते हैं नज़र…