आंसुओं का गीत – प्रियंका सौरभ

  जब हर दर्द से टकराकर, मन की दीवारें दरकने लगें, और उम्मीदों की चादर, चुपचाप सरकने लगे।   जब हँसी की परतें, ग़म के नीचे दब जाएं, और खामोशी…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

काश औलाद शान हो जाए। घर सभी बागबान हो जाए।   आज खुशियां मिली बहाने से। आपको प्यार जान हो जाए।   प्यार बेटी को तुम सदा करना। घर मे…

कड़वा सच – ऋतुबाला रस्तोगी

एक पूरी कौम जिसका, काम दहशत और हत्या। एक ऐसी नस्ल जिसकी, सोच नफरत और हत्या।   है फरेबी नाम बदले, हर घड़ी बदले ठिकाना। सीखती है बचपने से,कर मुहब्बत…

मुक्तक – श्याम कुंवर भारती

परवाह मेरी<> मैने दिल लगाया भी किससे जिसे प्यार की परवाह ही नहीं। चाहा कितना उसे जान से ज्यादा जिसे मेरी कोई चाह ही नहीं। दर्द ही दिया तड़पाया और…

अला अल-फलाह – सुनील गुप्ता

अल-फलाह रास्ता दिखलाते हैं, अल-इलाह  !!1!!   थे वह कौन जो पीछे छोड़ गए, मौत तबाही !!2!!   ख़ुदा बख्श दे या दे ज़रा सद्बुद्धि, इन्हें इलाही !!3!!   ईश्वर…

उठ गया विस्वास – नीलांजना गुप्ता

एक झोंके की तरह यह उड़ गया है। बर्फ के जैसे पिघल कर गल गया है। पक्षी थक कर गिर गया हो जैसे नभ से ।।   हुआ धूमिल भोर…

कविता – जसवीर सिंह हलधर

जुड़े प्रकृति के संग ,कला के साधन सारे । इंद्र धनुष के रंग , दीखते न्यारे न्यारे ।। होता यही स्वभाव , प्रकृति के रूप निराले । मौसम के बदलाव…

दुःख की घड़ी में (लघुकथा)-  सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – मास्टर जी का जब निधन हुआ, तो अर्थी को कन्धा देने के लिए चार कंधे भी नसीब नहीं हुए। कहने को उनका भरा पूरा परिवार था, किन्तु अड़ोसी…

बाल वाटिका’ बाल-साहित्य के क्षेत्र में सरस, स्नेहिल और संस्कारप्रद कृति – संजीव भटनागर

vivratidarpan.com – डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ की ‘बाल वाटिका’ बाल-साहित्य के क्षेत्र में एक सरस, स्नेहिल और संस्कारप्रद कृति के रूप में उभरती है। यह पुस्तक न केवल बच्चों के…

स्मृतियों की दीमक – रेखा मित्तल

दीमक शायद पढ़ना जानती थी तभी चाट गई अलमारी में रखी किताबों को बहुत ही बेरहमी से ताकि कोई दोबारा उन्हें पढ़ न सके तुम कहते ही रहे पर पढ़…